मसूरी:- म्युनिसिपल पोस्ट ग्रेजुएट कालेज मसूरी में दो दिवसीय नैक पीर टीम ने ऑन लाइन विजिट किया व म्युनिसिपल पोस्ट ग्रेजुएट कालेज मसूरी उत्तराखंड का पहला अशासकीय महाविद्यालय बन गया जहां ऑन लाइन विजिट हुई।
नैक के सफलता पूर्वक संपन्न करवाने में महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो अनिल चौहान तथा आईक्यूएसी समन्वय प्रो. शालिनी गुप्ता तथा आईक्यूएसी के सदस्य प्राध्यापकों व समस्त अशैक्षणिक कर्मचारियों का अभूतपूर्व योगदान रहा। महाविद्यालय ने नैक प्रक्रिया के तीन चरण आईआईक्यूए, एसएसआर व डीवीवी पहले ही संपन्न कर लिए गये थे। यह विजिट पहले मार्च माह में होनी थी लेकिन नैक की नीति में बदलाव होने पर स्थगित कर दी गयी व अब मई अंत में संपन्न हुई। नैक प्रक्रिया पूरे महाविद्यालय के लिए अभूतपूर्व अनुभव रहा। इस पूरी प्रक्रिया में महाविद्यालय के प्रबंध तंत्र का विशेष योगदान रहा। पूरे उत्तराखंड में इससे पूर्व राजकीय महाविद्यालय काशीपुर में ही इस तरह की विजिट हुई थी। नवीन प्रक्रिया होने के कारण महाविद्यालय के सामने अनेक चुनौतियां थी, जिसमें एक दो दिन तक सुबह से शाम तक नैक पीर टीम के साथ ऑन लाइन जुडा रहना तथा उन्हें पूरे महाविद्याल का जीपीएस की प्रक्रिया करना था जिसके लिए महाविद्यालय ने एक स्टूडियो की सहायता ली व पूरे दिन वह अपनी तकनीकि टीम के साथ मौजूद रहे। विजिट के दूसरे दिन महाविद्यालय प्रबंध समिति की अध्यक्ष मीरा सकलानी भी उपस्थित रही नैक पीर ने अपने क्लोजर रिमार्क में महाविद्यालय के प्राचार्य, आईक्यूएसी समन्वयक तथा समस्त स्टॉ के प्रसास की सराहना की कि विषम परिस्थितियों में भी महाविद्यालय के प्राचार्य व आईक्यूएसी समन्वयक ने महाविद्यालय के इतिहास में प्रथम बार साइकिल वन के लिए आवेदन किया गया। यह प्रक्रिया महाविद्यालय के अस्तित्व तथा छात्र छात्राओं के भविष्य के लिए अनिवार्य व महत्वपूर्ण है। यह वर्तमान में राज्य सरकार ने अनिवार्य कर दिया है। नैक पीर टीम ने महाविद्यालय के प्राचार्य व आईक्यूएसी समन्स्वयक को डायनामिक बताया गया। इस विजिट की सफलता से महाविद्यालय का पूरा स्टाफ प्रसन्न है व अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। इस प्रक्रिया में एक वर्ष से अधिक का समय लगा व सभी ने जी तोड़ मेहनत की। आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. शालिनी गुप्ता ने बताया कि महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अनिल कुमार के प्रयासों व दृढ इच्छाशक्ति के कारण यह कार्य संपन्न हो सका। उन्हांेने यह भी बताया कि पूर्व में भी वर्ष 2007 तथा वर्ष 2016 में तत्काली प्राचार्यों ने इस प्रक्रिया को संपन्न कराने का प्रयास किया था परंतु किन्ही कारणवश सफल नहीं हो सके। महाविद्यालय के प्राचार्य ने आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. शालिनी गुप्ता व समस्त महाविद्यालय परिवार व अध्यक्ष प्रबंध समिति का विशेष धन्यवाद किया। इस प्रक्रिया के सफल होने पर अब प्राप्तांक का इंतजार है।

