वीक एंड पर पर्यटकों को जाम से जूझने को मजबूर होना पड़ रहा है।

मसूरी। वीक एंड के साथ ही लांयस मंडल के चुनाव होने पर पर्यटन नगरी में बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने से जहां शहर में रौनक बढ़ गयी है वहीं लोगों को हमेशा की तरह जाम से जूझना पड़ रहा है। इस बार तो मसूरी के सभी मार्गो सहित टिहरी बाई पास रोड एनएच 707ए पर लक्ष्मणपुरी क्षेत्र व सुवाखोली में चार से पांच किमी तक का जाम लगा व लोगों को घंटों जाम में फंसे रहने पर मजबूर होना पड़ा।
पर्यटन नगरी में वीक एंड के साथ लायंस क्लब के चुनाव होने पर बड़ी संख्या में पर्यटकों ने मसूरी का रूख किया ताकि वे यहां के प्राकृतिक सौदर्य का आनंद ले सकें, लेकिन बार बार एक ही समस्या जाम की आ जाती है जिससे निजात पाना कठिन ही नही नामुमकिन हो गया है, लंढौर छावनी क्षेत्र के गुरूद्वारा चौक से मलिंगार तक तो सुबह से लेकर शाम तक जाम ही लगा रहता है वहीं शहीद भगत सिंह चौक पर भी दिन में कई बार लोगों को जाम से जूझना पड़ा। वहीं गांधी चौक, लाइब्रेरी किंक्रेग रोड, मोती लाल नेहरू मार्ग सहित अन्य मार्गों पर भी यही हाल रहा। यही नहीं इस बार तो मसूरी धनोल्टी मार्ग पर चार से पांच किमी का जाम लग जाने से पर्यटकों सहित स्थानीय वाहनों को घंटो जाम में फंसने पर मजबूर होना पड़ा। लंढौर टिहरी बाईपास रोड पर लक्ष्मणपुरी से लेकर वुड स्टाक स्कूल से भी आगे कई किमी का जाम लगा रहा व साथ ही सुवाखोली में भी यही हाल रहा व वहां भी कई किमी का जाम लगने से पर्यटकों को इससे जूझना पड़ा। हर वीक एंड पर जाम लगने से तो अब ऐसा लगने लगा है कि मसूरी में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है पुलिस व प्रशासन गहरी नींद में लग रहा है, जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड रहा है। जाम लगने से पर्यटकों को अपने गंतव्य तक पहुचने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है हालात इस तरह बिगड़ जाते है कि पैदल चलने वालों को भी रास्ता नहीं मिलता व उन्हें भी जाम के साथ धीरे धीरे सरकना प़डता है। इसके पीछे किसकी कमी है यह तय कर पाना कठिन हो रहा है। हर विभाग एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ने की बात करता है। लेकिन इसका समाधान कैसे हो इस पर किसी का ध्यान नहीं है जबकि इसके लिए दीर्घ कालिक योजना बनायी जानी चाहिए। हर बार जब भी सीजन को लेकर बैठक होती है उसमें सबसे प्रमुख मुददा जाम का उठाया जाता है लेकिन इस समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से हर बार स्थिति विकट बन जाती है, जिसके परिणाम स्वरूप मसूरी का नाम खराब हो रहा है व इसे जाम शहर के रूप में जाना जाने लगा है। अगर यही स्थिति रही तो मसूरी के पर्यटन पर इसका बुरा असर पडे़गा।