वरिष्ठ भाजपा नेता रवीद्र जुगराण ने भी मसूरी विधानसभा से दावेदारी प्रस्तुत की।

मसूरी। भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व अध्यक्ष उत्तराखंड आंदोलनकारी परिषद रवींद्र जुगराण ने कहा कि उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों का सिलसिला शुरू हो चुका है, ऐसे में उन्होंने राजनैतिक जीवन में 36 वर्षों तक संघर्ष किया व आम जनता की समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया,आज समर्थकों की मांग ,राय व दबाव पर मसूरी विधानसभा से चुनाव लड़ने का दावा प्रस्तुत कर रहा हूं। उन्होंने कहाकि मसूरी केवल उत्तराखंड, भारत ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान है। इसका बड़ा महत्व रहा है।
उन्होेंने कहा कि ब्रिटिश काल से पहले की बात हो या बाद की मसूरी का स्थान अलग है यहां पर 15 से 20 देशों के राजदूतावास थे व 1960 तक यह जारी रहा। मसूरी का कनेक्शन अंतर्राष्ट्रीय रहा। इसका इतिहास बहुत गरिमापूर्ण रहा है। यहां के कब्रिस्तानों में दो सौ साल के बडे नाम, इतिहासकार, शिक्षाविद, राजनीतिक व्यक्ति व कई बड़ी हस्तियां दफन है। मसूरी की गरिमा को वापस लाने की कवायद होना चाहिए। लेकिन न ही जनप्रतिनिधि गंभीर रहे, न राज्य सरकार व न ही किसी अन्य ने प्रयास  किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने  मसूूरी विधानसभा  से दावेदारी की है, लेकिन चुनाव चिन्ह कमल का फूल ही  रहेगा, जिसे भाजपा का टिकट मिलेगा उसके साथ पूरी ताकत से कार्य किया जायेगा। 36 वर्षो की राजनीति, सामाजिक यात्रा के उपरांत मसूरी, देहरादून व आसपास के लोग, जो उनके कार्य का मूल्यांकंन कर रहे है, उनकी भावना, राय का सम्मान का मान रखते हुए व स्वयं इच्छुक होते हुए दावा प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहाकि कई वह दलगत राजनीति से उपर उठकर राज्य हित में  चंद सरोकारों को रखता हूं, मैं उत्तराखंड राज्य को नबंर वन पर रखता हूं, मेरे लिए दूसरे नबंर पर सरकार व तीसरे नंबर पर राजनैतिक दल आते हैं। इस प्रदेश के जन सरोकार, समस्यायें पहले हैं। राज्य निर्माण की मूल अवधारणा के अनुरूप हम उत्तराखंड को बढा पाये हैं ऐसा नहीं लगता, मेरी अंर्तआत्मा बोलती है कि राजनीति का गंदा स्वरूप सामने आ रहा है, नेता को सम्मान से नहीं देखते क्यों कि राजनीति में लोग अपने स्वार्स्थ, अपने घर को भरने के लिए आ रहे हैं, उन्हें सम्मान की नजर ने नहीं देखते, समाज का हित जन सरोकारों का हित, राज्य का हित, नेपथ्य में जा रहे हैं। मै हमेशा राजनीति में सुचिता, पारदर्शिता, नैतिकता व जन सरोकारों का पक्षधर रहा हूं, अगर मुझे चुनने की बाारी आयी तो निश्चित रूप में ईमानदारी, सुचिता, पारदर्शिता, जबावदेही , अच्छे आचरण को प्राथमिकता दूंगा। अगर कोई अन्य दल का भी कोई अच्छा प्रत्याशी होगा तो हमेशा जनता मूल्याकंन के साथ उसका मूल्याकंन करे व जनसरोकारों की राजनीति में भेजे, चाहे पंचायत हो, निकाय हो या विधानसभा हो वहां भेजें। पं. दीनदयाल उपाध्याय ने कहा है कि अगर किसी प्रत्याशी का गलत चयन भी हो जाय तो जनता उसका सुधार कर सकती है व निष्पक्ष, जन सरोकारों से जुडे नेता को चुन सकती है। उन्होंने कहा कि मसूरी का राज्य गठन के बाद इसके स्वरूप में तेजी से बदलाव आया है, जिस तरीके से यहां के पर्यावरण को नुकसान पहुचाया जा रहा है, कंक्रीट का जंगल खडे किए जा रहे है, इसका खामियाजा मसूरी वालों को भुगतना पडेगा। अगर गर्मी बढेगी तो पर्यटक यहां नहीं आयेगा। निर्माण हो ,विकास हो, लेकिन अवैध, नियमों के विरूद्ध कोई निर्माण न हो। आम नागरिक दो कमरे नहीं बना सकता लेकिन पूंजीपतियों के बडे निर्माण हो रहे हैं यह विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खडे हो रहे हैं। राज्य निर्माण की अवधारणा से भटक गये हैं। इस मौके पर दीप जोशी, अनिल पेटवाल, रवींद्र गुसांई, नरेंद्र पडियार, गंभीर पंवार, अनिल गोदियाल, सुनील रतूडी, विजय रमोला, अमित कैंतुरा आदि मौजूद रहे।