मसूरी:-:आर्यम इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन के तत्त्वावधान में संचालित भगवान शंकर आश्रम ने वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आश्लेषा नक्षत्र की शुभ एवं प्रशस्त वेला में माँ बगलामुखी जयंती के दिन भारत के दुश्मनों के समूल विनाश हेतु माँ बगलामुखी पीतांबरा अग्निहोत्रम धूम धाम से संपन्न हुआ।
ट्रस्ट के अध्यक्ष और आश्रम के मुख्य अधिष्ठाता परमप्रज्ञ जगतगुरु प्रोफ़ेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम जी महाराज के सनिध्य में हुए इस अनुष्ठान में देश विदेश से लगभग 250 श्रद्धालुओं ने भाग लिया। देवी के तंत्रोक्त मंत्रों से समस्त घाटी गूंज उठी। आर्यम जी महाराज ने बताया कि माँ बगलामुखी, जिन्हें पितांबरा देवी भी कहा जाता है, दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। उनका स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली है; उनके हाथ में शत्रु के जिह्वा को पकड़ने का प्रतीक है, जो वाणी और शत्रुता पर नियंत्रण का संकेत देता है। सभी तरह के राग, रोग, ऋण और आग से मुक्ति प्रदान करने में माँ बगला सर्वाधिक तीव्रता से कार्य करती हैं। चूंकि माँ बगला स्वयं पीले वस्त्र धारण करती हैं, इसी के दृष्टिगत पूजा में पीले वस्त्र, पीले फूल, कद्दू, एवं हल्दी का प्रयोग किया जाता है। जीवन में आने वाले बड़े से बड़े संकट माँ बलगामुखी की कृपा से दूर हो जाते हैं। आश्रम में आये देवी के भक्तों को गुरुदेव आर्यम ने माँ बगलामुखी की अवधारणाओं से परिचित कराया। उन्होनें बताया कि किस तरह पीला रंग शक्ति का प्रतीक है। मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी पीला रंग आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान और आंतरिक शक्ति से जुड़ा होता है, जो व्यक्तिगत शक्ति के पहलू है। पीला रंग ऊर्जा, बुद्धिमत्ता, आशावाद और स्पष्टता का प्रतीक है, जो प्रेरणा और मानसिक सक्रियता को बढ़ाता है। पूजा में सभी देवी के भक्त गण पीले परिधान में सक्रियता के साथ जुड़े। सहस्त्र मंत्रों से पुष्पार्चन और माँ बगलामुखी के मंत्र से अग्निहोत्रम के अद्वितीय संयोग से देवी का आह्वान किया गया।
आज का युग इनफार्मेशन का युग है। सोशल टेक्नॉलजी की मदद से हम सात समुंदर पार हो रही घटनाओं के बारे में सुविज्ञ रहते हैं। इसके बावजूद अकस्मात् से हमें कोई नहीं बचा सकता। ऐसे में उन परिस्थितियों से केवल ईश्वरीय उर्जाएँ ही हमें सुरक्षित रखती हैं। माँ बगलामुखी शत्रु शमन की देवी हैं और श्री आर्यम ने सभी भक्तों के साथ सम्पूर्ण राष्ट्र के हित हेतु इस महाअनुष्ठान को संकल्पित किया। विशेष पूजाएं विशेष आयामों एवं ऊर्जाओं से संचालित होती हैं। देवी बगलामुखी की कृपा हेतु विशेष रूप से पीले पुष्प, गुलाबी और श्वेत कमल के फूलों से एक हज़ार मंत्रों से अनुष्ठान संपन्न हुआ। ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता माँ यामिनी श्री ने बताया कि देश विदेश में श्री आर्यम गुरुदेव सनातन धर्म के ध्वजा को और ऊंचा फहरा रहे हैं। हमारे धर्म के ऐसे अनेकों पर्वों पर से पर्दा हटाकर, एक सामान्य हिन्दू को उसकी पहचान के नए आयामों से अवगत करा रहे हैं। सम्पूर्ण विश्व में आर्यम गुरुदेव के सर्वाधिक दीक्षित शिष्य हैं। देश विदेश में आज लोग अपने घरों में अग्निहोत्रम, पुष्पार्चन, वेद पाठ एवं अन्य प्रार्थनाओं को अपनी जीवन शैली का हिस्सा बना रहे हैं। श्री आर्यम गुरुदेव का कथन है कि विधि विधान से की गई पूजा-पाठ न केवल ईश्वरीय ऊर्जा को आकर्षित करती है बल्कि सम्पूर्ण समाज को संतुलित और प्रगतिशील बनाती है। कार्यक्रम को सफ़ल बनाने में अविनाश जायसवाल, श्वेता, हर्षिता, यामिनी श्री, रोहित वेदवान, रमन, उत्कर्ष, सुनील कुमार आर्य, प्रतिभा, संध्या रघुवंशी, ज्योति आर्य, गौरव स्वामी, शालिनी आदि का सहयोग रहा।

