मसूरी–पर्यटन नगरी मसूरी इस वक्त आपदा की चपेट में है, जगह-जगह भूस्खलन, सड़कों का टूटना, मकान का ढहना, पुस्तों का गिरना बदस्जातूर जारी है। यदि गौर करें तो कुछ वर्ष पहले तक बरसात होती थी किंतु यदा कदा ही इस किस्म की घटनाएं देखने सुनने को मिलती थी, पूरे वर्ष काल में इक्का-दुक्का ही ऐसी घटनाएं शहर में देखने को मिलती थी किंतु कुछ समय से ऐसी घटनाओं में भारी इजाफा हुआ है। बुद्धिजीवी इसका संबंध मसूरी में हो रहे अत्यधिक भवन निर्माण, वनों का पातन, मशीनों द्वारा पहाड़ों को काटना मानते हैं। जहां एक ओर बाहरी पूंजीपति शहर में आकर संबंधित विभागों से सांठगांठ कर नियमों को ताक पर रखकर बड़े-बड़े भवनों का निर्माण कर रहे हैं जिसमें विभागों के कर्मचारी व अधिकारी ही में पूंजीपतियों को कानून की खामियां दिखाकर सहयोग करते हैं वहीं कुछ ठेकेदार भी अधिकारियों की मिली भगत से इस कार्य को अंजाम देते हैं तथा नियमों को ताक पर रखकर नक्शे पास करा कर नशे से हटकर निर्माण कार्य करते हैं, जिससे धीरे-धीरे भू संतुलन गड़बड़ाता जा रहा है तथा आपदा की घटनाओं में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है वहीं दूसरी ओर स्थानीय गरीब नागरिक दो कमरों का भवन बनाने में भी असमर्थ है यदि कोई हिम्मत करता भी है तो उसका भवन विभाग द्वारा सील कर दिया जाता है।

पर्यटन नगरी को बदरंग बनाने में इन्हीं बिल्डरों व पूंजी पतियों की भागीदारी नहीं है अपितु यहां पर अंग्रेजी माध्यम के स्कूल भी धड़ल्ले से इस ओर कार्य कर रहे हैं ,अधिकारियों की मिली भगत व ठेकेदारों के संबंधों का फायदा उठाकर थोड़े क्षेत्र का नक्शा पास करा कर कानून को ताक पर रखकर नक्शे से बाहर जाकर कार्य किया जा रहा है, अवैधतरीके से पेड़ों का पतन किया जा रहा है तथा मशीनों द्वारा पहाड़ों को काटकर भावनाओं का निर्माण किया जा रहा है। अंग्रेजी माध्यम के स्कूल नोटिफाईड क्षेत्र में भी भवन निर्माण कार्यों को जारी रखे हुए हैं जिससे पेड़ पौधों का तो नुकसान होता ही है भारी मशीनों से हो रही भूमि कटान से जमीन भी कमजोर हो रही है जिसका खामियाजा आम जन को भुगतना पड़ रहा है। जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है साथ ही पर्यटन पर भी इसका गहरा असर देखने को मिल रहा है। यदि इस पर समय रहते रोक न लगाई गई तो आने वाले समय में इसकी भारी कीमत शहर वासियों को भुगतनी पड़ेगी।

