मसूरी:- मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन ने अंग्रेजी लेखक व पर्वतारोही बिल एटकिन के निधन पर तिलक लाइब्रेरी सभागार में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। जिसमें दो मिनट का मौन रखा गया व इस मौके पर वक्ताओं ने उनसे जुड़ी यादों व संस्करणों पर प्रकाश डाला।
तिलक लाइब्रेरी सभागार में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहाकि बिल एटकिन अंग्रेजी के ऐसे लेखक थे जिन्होंने पूरा जीवन उत्तराखंड व मसूरी में बिताया। हालांकि उन्हें घूमने का बहत शौक था व उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण भी किया। उन्होंने बताया कि बिल एटकिन पूरी तरह से पहाड़ में रच बस गये थे व हिंदु धर्म अपना लिया था व उनका अंतिम संस्कार भी हरिद्वार में किया गया। उन्होने बताया कि जब वह बाजार से जब सामान खरीदने जाते थे तो केवल भारतीय उत्पाद ही खरीदते थे। उन्होंने मसूरी में रहकर कई पुस्तकें लिखी। इस मौके पर उन्हानें कहा कि उनके आवास को संग्रहालय बनाया जाय, उनके भवन को हेरिटेज भवन बनाया जाय ताकि आने वाले लोग उनके बारे में जान सकें। उन्होंने नंदादेवी, सांई बाबा, भारतीय रेल पर पुस्तकें लिखी। इस मौके पर लेखक गणेश सैली ने कहा कि बिल एटकिन ने कहा कि उनका जो साहित्य है, उन्हें सुरक्षित रखना चाहिए व उनके नाम से बिल आईकेन मेमोरियल ट्रस्ट बनाया जाय। लेकिन दुःखद है कि उनकी मौत के अगले ही दिन उनके आवास पर कब्जा करने का प्रयास किया जाय। इसके लिए प्रदेश सरकार को संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्काट लैड में पैदा हुए लेकिन वह गढवाली थे, उन्हें यहां का खानपान, रीति रिवाज बहुत पसंद था। इस मौके पर इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने कहा कि बिल एटकिन को घूमने का बहुत शौक था व मसूरी में भी हाथ मे लठ लेकर घूमते रहते थे। उन्होंने कहाकि जब मैने पुस्तक लिखी तो उसके लिए उनसे मसूरी के बारे में जानकारी ली। रेलवे, सेवन सीक्रेट रीवर, नंदा वायोस्पेयर उनकी प्रमुख पुस्तके हैं। वे हिदु रीति रिवाज से खासे प्रभावित थे, उन्हें पहाडियों व पहाडों से बहुत प्यार था। उन्हांेने कहा कि जिस भवन में वह रहे वह जींद की महारानी पृथ्वी कौर का था और उन्होंने उस भवन की व्हील लिखकर उनके नाम की थी लेकिन उन्होंने उनकी व्हील को फाड दिया व कहाकि कि इस दुनिया में सभी किरायेदार है, मुझे इस भवन का क्या करना। गोपाल भारद्वाज ने कहाकि मसूरी लेखकों का शहर रहा है जहां अनेक विश्व प्रसिद्ध लेखको ने मसूरी मे रहकर साहित्य लिखा। इस मौके पर अधिवक्ता मनोज सैली ने कहाकि बिल की संपत्ति को सुरक्षित रखा जाना चाहिए व उसे संग्रहालय बनाया जाना चाहिए। सरकार को इसका संज्ञान लेना चाहिए। उन्हांेने कहाकि उनके भवन को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि लोग यहां आकर उनके बारे में जान सकें। इसके लिए सत्य सांई बाबा ट्रस्ट को भी आगे आना चाहिए। इस मौके पर बिल एटकिन के सहयोगी अरविंद चौहान, लेखक प्रवेश वाही, सुरभि अग्रवाल, गुड मोहन, जगजीत कुकरेजा, धनप्रकाश अग्रवाल, अनीता सक्सेना, नागेद्र उनियाल, विजय बिंदवाल, डा. आरएस बिष्ट, राजेश शर्मा, सहित लोग मौजूद रहे। अंत में एक मिनट का मौन रखकर बिल एटकिन को श्रद्धांजलि दी गयी।
तिलक लाइब्रेरी सभागार में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहाकि बिल एटकिन अंग्रेजी के ऐसे लेखक थे जिन्होंने पूरा जीवन उत्तराखंड व मसूरी में बिताया। हालांकि उन्हें घूमने का बहत शौक था व उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण भी किया। उन्होंने बताया कि बिल एटकिन पूरी तरह से पहाड़ में रच बस गये थे व हिंदु धर्म अपना लिया था व उनका अंतिम संस्कार भी हरिद्वार में किया गया। उन्होने बताया कि जब वह बाजार से जब सामान खरीदने जाते थे तो केवल भारतीय उत्पाद ही खरीदते थे। उन्होंने मसूरी में रहकर कई पुस्तकें लिखी। इस मौके पर उन्हानें कहा कि उनके आवास को संग्रहालय बनाया जाय, उनके भवन को हेरिटेज भवन बनाया जाय ताकि आने वाले लोग उनके बारे में जान सकें। उन्होंने नंदादेवी, सांई बाबा, भारतीय रेल पर पुस्तकें लिखी। इस मौके पर लेखक गणेश सैली ने कहा कि बिल एटकिन ने कहा कि उनका जो साहित्य है, उन्हें सुरक्षित रखना चाहिए व उनके नाम से बिल आईकेन मेमोरियल ट्रस्ट बनाया जाय। लेकिन दुःखद है कि उनकी मौत के अगले ही दिन उनके आवास पर कब्जा करने का प्रयास किया जाय। इसके लिए प्रदेश सरकार को संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्काट लैड में पैदा हुए लेकिन वह गढवाली थे, उन्हें यहां का खानपान, रीति रिवाज बहुत पसंद था। इस मौके पर इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने कहा कि बिल एटकिन को घूमने का बहुत शौक था व मसूरी में भी हाथ मे लठ लेकर घूमते रहते थे। उन्होंने कहाकि जब मैने पुस्तक लिखी तो उसके लिए उनसे मसूरी के बारे में जानकारी ली। रेलवे, सेवन सीक्रेट रीवर, नंदा वायोस्पेयर उनकी प्रमुख पुस्तके हैं। वे हिदु रीति रिवाज से खासे प्रभावित थे, उन्हें पहाडियों व पहाडों से बहुत प्यार था। उन्हांेने कहा कि जिस भवन में वह रहे वह जींद की महारानी पृथ्वी कौर का था और उन्होंने उस भवन की व्हील लिखकर उनके नाम की थी लेकिन उन्होंने उनकी व्हील को फाड दिया व कहाकि कि इस दुनिया में सभी किरायेदार है, मुझे इस भवन का क्या करना। गोपाल भारद्वाज ने कहाकि मसूरी लेखकों का शहर रहा है जहां अनेक विश्व प्रसिद्ध लेखको ने मसूरी मे रहकर साहित्य लिखा। इस मौके पर अधिवक्ता मनोज सैली ने कहाकि बिल की संपत्ति को सुरक्षित रखा जाना चाहिए व उसे संग्रहालय बनाया जाना चाहिए। सरकार को इसका संज्ञान लेना चाहिए। उन्हांेने कहाकि उनके भवन को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि लोग यहां आकर उनके बारे में जान सकें। इसके लिए सत्य सांई बाबा ट्रस्ट को भी आगे आना चाहिए। इस मौके पर बिल एटकिन के सहयोगी अरविंद चौहान, लेखक प्रवेश वाही, सुरभि अग्रवाल, गुड मोहन, जगजीत कुकरेजा, धनप्रकाश अग्रवाल, अनीता सक्सेना, नागेद्र उनियाल, विजय बिंदवाल, डा. आरएस बिष्ट, राजेश शर्मा, सहित लोग मौजूद रहे। अंत में एक मिनट का मौन रखकर बिल एटकिन को श्रद्धांजलि दी गयी।

