मसूरी:- शहीद स्थल पर मजदूर संघ ने ई रिक्शा देने, सिफनकोर्ट के बेघरों को आवास उपलब्ध करवाने व एमडीडीए पार्किग लंढौर को मजदूर संघ के नाम करने आदि मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया।
शहीद स्थल पर आयोजित धरना प्रदर्शन में मजदूर संघ के सदस्यों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की व कहा कि लगातार प्रदेश सरकार, जिलाधिकारी, एसडीएम व नगर पालिका से मांग करने पर भी उनकी मांगों को अनदेखा किया जा रहा है जिसके विरोध में तीन दिवसीय धरना प्रदर्शन शुरू किया गया है। इस मौके पर मजदूर संघ के महामंत्री संजय टम्टा ने कहा कि मजदूर संघ 2017 से लगातार मांग कर रहा है जिसमें साइकिल रिक्शा के स्थान पर ईरिक्शा को ईरिक्शा में परिवर्तित करना, 2020 कोरोनाकाल में सिफन कोर्ट के मजदूरों को रोपवे के नाम पर बेघर कर दिया था लेकिन आज तक उन 80 परिवारों को आवास नहीं दिए गये जबकि आईडीएच में प्रदेश के मुख्यमंत्री व मसूरी के विधायक व मंत्री गणेश जोशी ने आवास निर्माण कार्य का शिलान्यास किया था जो हंस फाउंडेशन से बनाये जाने थे आज तक नहीं बने वहीं 1995 से 2023 तक एमडीडीए पार्किग लंढौर मजदूर संघ के नाम पर दी जाती थी लेकिन इस उसके बाद नगर पालिकाध्यक्ष व नगर पालिका ईओ ने पार्किेग अपने चहेतो को दे दी जिसमें राजस्व विभाग का नुकसान भी किया गया, मजदूर संघ के पास 9 लाख में थी व व्यक्ति विशेष को चार लाख साठ हजार में दी गई इसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शहीद स्थल पर तीन दिवसीय धरना प्रदर्शन किया जायेगा व उसके बाद भी सुनवाई नहीं हुई तो आगामी दो सितंबर को मसूरी में मजदूर अपनी ताकत दिखायेगें व किसी नेता को शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि देने नहीं आने देंगे। इस अवसर पर मनीष गौनियाल, मजदूर संघ अध्यक्ष रणजीत सिंह चौहान, महामंत्री संजय टम्टा, विरेंद्र सिंह डुगरियाल, संपत्ति लाल, खिमानंद नौटियाल, रणवीर सिंह, पारेश्वर नौटियाल, नरेश मल्ल, जैमल सिंह, मुलायम सिंह, मुकेश लाल, महावीर सिंह पंवार, आदि मजदूर संघ के सदस्य मौजूद रहे। वहीं दूसरी ओर मजदूर संघ के पूर्व मंत्री गंभीर सिंह पंवार ने कहा कि एमडीडीए पार्किग नगर पालिका परिषद ने रिक्शा मजदूर को ही दी है व पिछली पार्किग की राशि से एक लाख बढोत्तरी कर दी है इसमें कोई राजस्व का नुकसान नहीं हुआ है, वहीं कहा कि जो नौ लाख की बात की जा रही है वह पहले दो मंजिल पार्किग के लिए थी अब केवल एक मंजिल पर पार्किग है एक मंजिल स्थानीय लोगों को निःशुल्क दी गई है। वहीं उन्होंने सिफन कोर्ट के मजदूरों को आवास देने का समर्थन किया लेकिन साथ ही कहा कि सिफर्न कोर्ट में बीस कमरे थे, जिसमें मजदूर रहते थे उन्हीं को आवास दिया जाना चाहिए, बाकी सरकारी भूमि पर अवैध रूप से निवास करते थे।

