आम आदमी पार्टी प्रवक्ता ने मसूरी देहरा विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर खड़े किए सवाल।

मसूरी:- आम आदमी पार्टी के जिला प्रवक्ता प्रकाश राणा ने मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक खुला पत्र प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के नाम लिखा है। जिसमें उन्होंने प्राधिकरण के अधिकारियों पर भेदभाव पूर्ण रवैया अपने का आरोप लगाया है।
उन्होंने विकास प्राधिकरण के अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि उनकी मिली भगत से मसूरी में पूंजी पतियों के अवैध निर्माण हो रहे हैं। इन अधिकारियों ने एक खेल शुरू कर रखा है की नक्शा कम पास कराकर अधिक निर्माण कार्य किया जा रहा है। वही गरीब आदमी दो कमरे का घर भी नहीं बन पा रहा है यदि कोई गरीब हिम्मत दिखाता भी देता है तो उसका निर्माण तुरंत सील कर दिया जाता है जबकि यदि पूंजीपतियों का निर्माण सील भी होता है तो उसे तुरंत खोल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए एक होना चाहिए यदि गरीब का निर्माण सील होता है तो अमीर का अवैध निर्माण भी सील होना चाहिए। यदि आमिर को ढील दी जाती है तो गरीब को भी दी जानी चाहिए।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की मिली भगत से जहां एक और पूंजीपतियों का निर्माण धड़ल्ले से हो रहा है वहीं गरीब लोगों का निर्माण सील किया जा रहा है। उन्होंने प्राधिकरण के सहायक अभियंता अभिषेक भारद्वाज पर आरोप लगाते हुए कहां कि उन्हें इस संबंध में पूर्व में भी अवगत कराया गया था किंतु उनके द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई।
उन्होंने माल रोड पर स्थित होटल ग्रीन कैसल का उदाहरण देते हुए कहा कि होटल का बेसमेंट रातों-रात खोल दिया जाता है तथा पक्की सीढ़ियां भी बना दी जाती है किंतु इन अधिकारियों को यह सब दिखाई नहीं देता है तुम्हें तो सिर्फ गरीब के दो कमरे दिखाई देते हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि प्राधिकरण को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार जाना होगा ,अमीर और गरीब के लिए एक ही नीति से कार्य करना होगा वरना आम आदमी पार्टी सड़कों पर आंदोलन करेगी व जनता के सहयोग से इन भ्रष्ट अधिकारियों विरुद्ध प्रदर्शन किए जाएंगे। उन्होंने प्राधिकरण के उपाध्यक्ष से अनुरोध किया कि इस किस्म की दोगली नीतियों को छोड़कर निष्पक्ष कार्य किया जाए।
प्राधिकरण के सहायक अभियंता अभिषेक भारद्वाज की कार्यप्रणाली को लेकर आम आदमी शुरू से ही आक्रोशित है देखना यह है कि जनता का आक्रोश कब सड़कों पर दिखाई देता है।