मसूरी:-पर्यटन नगरी मसूरी में चुनावों की घोषणा होते ही अवैध निर्माण कार्यों की बाढ़ सी आ गई है। शहर का कोई भी ऐसा हिस्सा नहीं है जहां पर निर्माण कार्य न हो रहे हो या पहाड़ का खुदान व कटान न हो रहा हो। ऐसे में एमडीडीए व वन विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल उठने लाजिमी हैं। निर्माण कार्यों के चलते वन संपदा का भारी नुकसान हो रहाहै जिससे पर्यावरण को भी खतरा पैदा हो रहा है।
इन दिनों मसूरी व आसपास के क्षेत्र में भू माफिया बिना विभागों की अनुमति के जंगलों के बीच में अवैध रूप से खदान कर प्लॉट तैयार कर रहे है व चुनाव का फायदा उठा रहे हैं। साथ ही प्लाटिंग से निकलने वाले मलवे को भी जंगलों में फेंका जा रहा है जिससे वन संपदा को भी नुकसान हो रहा है। इससे एमडीडीए व वन विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान उठने लगे हैं। एमडीडीए, वन विभाग केवल चालान व नोटिस तक सीमित रह गया है जिसके चलते भू माफियाओ के हौसले और भी बुलंद होते जा रहे हैं व आए दिन निर्माण कार्यों को अंजाम देने में लगे हुए हैं। जिसके चलते पूरा शहर कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होता जा रहा है। वही एमडीडीए अपने बायलाज से बाहर जाकर नालों खालों में भी नक्से पास कर रहा है जो कि नियम के विरूद्ध है । सबसे ज्यादा निर्माण कार्य बालोगंज, झड़ी पानी, एविलोन रिसोर्ट के समीप, पुराने टिहरी बस स्टैण्ड, कैमल बैक रोड व माल रोड पर हो रहे हैं लेकिन एमडीडीए व वन विभाग इस दिशा में कोई भी कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। एमडीडीए के अधिशासी अभियंता अतुल गुप्ता का कहना है कि जिन जगहों से अवैध निर्माण कार्य करने की जानकारी मिल रही है उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं लेकिन बावजूद इसके धडल्ले से अवैध निर्माण कार्य किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिना विभाग की अनुमति के निर्माण कार्य करने वालों को पूर्व में नोटिस जारी किए गए हैं लेकिन उसके बावजूद भी लोग चोरी छिपे निर्माण कार्य कर रहे हैं, जिनको रोकने के लिए विभाग के अधिकारी मौके पर भेजे गए हैं यदि इसके बावजूद भी बिना विभाग की अनुमति के कोई भी निर्माण कार्य करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- एमडीडीए व वन विभाग की कार्यशैली हमेशा से विवादों में रही है, यहाँ पर अमीरों के लिए अलग नियम तथा गरीबों के लिए अलग नियम होतेहैं, कुछ समय पहले शहर की जनता इन विभागों के विरुद्ध लामबंद होने लगी थी जिस कारण एमडीडीए में कुछ अधिकारियों के तबादले भी हुए किन्तु आज स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।

