मसूरी :- आध्यात्मिकता की दुनिया में विशेष स्थान रखने वाले माधव गौडेश्वर वैष्वणाचार्य स्वामी पुंडरिक गोस्वामी का मसूरी इंटरनेशनल स्कूल पहुंचने पर प्रधानाचार्या शालू बब्बर के नेतृत्व में भव्य स्वागत किया गया।
विद्यालय के सभागार में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में मसूरी इंटरनेशनल स्कूल की छात्राओं को अध्यात्मिकता और जीवन मूल्यों पर प्रेरणादायक प्रवचन दिए। उनके विचारों ने छात्राओं को न केवल आध्यात्मिक जागरूकता की ओर प्रेरित किया, बल्कि जीवन के उच्च आदर्शों को अपनाने की सीख भी दी। स्वामी पुंडरिक गोस्वामी ने अपने प्रवचन में जीवन के आध्यात्मिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे अध्यात्म से जीवन में संतुलन और शांति प्राप्त की जा सकती है। उनके अनुसार, मन की शुद्धि और विचारों की सकारात्मकता ही सच्चे सुख का मार्ग है। स्वामी जी ने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में सद्गुणों को अपनाएँ और समाज की भलाई के लिए कार्य करें। इस मौके पर स्वामी पुंडरिक की धर्म पत्नी रेनुका गोस्वामी ने अपने सम्बोधन में कहा कि सत्यनिष्टा से किया गया कर्म कभी भी असफल नही होता है। इस मौके पर पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला व पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल ने अपने संबोधन में स्वामी पुंडरिक के प्रवचन की सराहना की और इसे आज के युवाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। प्रधानाचार्या श्रीमती शाल्लू बब्बर ने स्वामी और उनकी धर्मपत्नी रेनूका गोस्वामी का स्वागत करते हुए कहा कि उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन छात्राओं को सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। उन्होंने कहा कि ऐसे अध्यात्मिक कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं। छात्राओं ने बड़े उत्साह के साथ इस कार्यक्रम में भाग लिया और स्वामी जी के विचारों को आत्मसात किया। कई छात्राओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अध्यात्मिकता के महत्व को समझा और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लिया। अंत में उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर कार्यक्रम का समापन किया गया। इस मौके पर विद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाएं, अतिथि एवं छात्रांए मौजूद रही।
पुंडरिक गोस्वामी आध्यात्म की दुनिया का ऐसा नाम है जिन्होंने अपने ज्ञान और अनुभवों से समाज को प्रेरित किया। पुंडरीक गोस्वामी ने मात्र 7 साल की उम्र में भागवत गीता का ज्ञान देकर दुनिया को चकित कर दिया था। आज वह अपने प्रवचनों और कार्यों से लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। पुंडरीक गोस्वामी का जन्म 20 जुलाई 1988 को वृंदावन में हुआ था। वह प्रसिद्ध संत अतुल कृष्ण गोस्वामी महाराज के पोते और श्रीभूति कृष्ण गोस्वामी महाराज के पुत्र हैं। उनके परिवार में 38 पीढ़ियों से भागवत कथा की परंपरा चली आ रही है। ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग को चुना। पुण्डरीक गोस्वामी ने अपने जीवन को चौतन्य महाप्रभु के संदेश को वैष्णव शास्त्रों के व्याख्यान द्वारा विश्व भर में प्रचारित करने में समर्पित कर दिया है, उन्होंने भारतीय धार्मिक और भक्ति विरासत से युवाओं को अवगत कराने के लिए अपनी शिक्षाओं का प्रसार किया है।

