मसूरी:- एमपीजी कालेज में शिक्षकों के आपसी विवाद के बाद प्रधानाचार्य प्रो. अनिल चौहान ने कहा कि कुछ लोग इस मामले को तूल देकर महाविद्यालय की साख को खराब करने का प्रयास कर रहे है। जबकि ऐसा कुछ नहीं है। महाविद्यालय की प्राथमिकता नैक करवाना होता है जो भारत सरकार द्वारा लागू है, नैक करवाने में दो वर्ष लगे व 38 लोगों की टीम ने इसमें सहयोग किया।
प्रधानाचार्य प्रो. अनिल चौहान ने कहा कि नैक को लेकर कुछ लोग गलत बयानबाजी कर रहे है, व शिक्षण संस्थान का अहित करने पर तुले हैं जबकि शिक्षण संस्थान बड़ा होता है, लेकिन तथ्य से परे की बातें कर नैक को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने महाविद्यालय के शिक्षक प्रमोद भारतीय के प्रमोशन पर कहा कि वह पहले महाविद्यालय छोड कर बिहार चले गये थे व वहां नौकरी की, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर बिहार के दो दर्जन महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों को बर्खास्त किया गया जिसके बाद वह वापस एमपीजी कालेज आये लेकिन उनके प्रमोशन में यह बाधा है कि उनकी सर्विस को लगातार नहीं माना जा सकता, किसी व्यक्ति विशेष का हित बडा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई शिकायतें की गई जिस पर कमेटी का गठन किया गया व कमेटी ने भी सब कुछ सही पाया। लेकिन कुछ लोग छात्रों को गुमराह कर रहे हैं व माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे है व नैक की टीम व तकनीकि टीम को भी भ्रमित करने का प्रयास किया गया। जहां तक शालिनी गुप्ता का मामला है जिस समय उनका विवाद हुआ वह वहां मौजूद नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि नैक को करवाने में महाविद्यालय की प्रबंधक व पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी ने भी आर्थिक रूप व अन्य रूप से पूरा सहयोग किया। वहीं प्रधानाचार्य अनिल चौहान ने कहा कि महाविद्यालय मे नैक के दौरान जो घटना घटी उसकी पूरी रिपोर्ट महाविद्यालय की प्रबंधक पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी को लिखित में दे दी गई है।

