मसूरी। प्रभा खेतान फाउंडेशन का यह चौथा संस्करण है जो राइट सर्कल व अहसास के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया जा रहा है जिसमें देश की ख्याति प्राप्त एस्ट्रो लॉजर व लेखक शालिनी मोदी के साथ भारतीय एस्ट्रोलॉजी, पुराण, वेद आदि पर चर्चा करेगी। उनके साथ एस्ट्रोलॉजर व वेद पुराणों की ज्ञाता राशी सोबती ने विभिन्न विषयों पर संवाद किया। वहीं उन्होंने लोगों के सवालों के उत्तर भी दिए।
कार्यक्रम में मेथोलॉजी विद माडर्न लाइफ इन रास इन डिवाइन रिलेशनशिप पर संवाद किया। वहीं उनकी नई पुस्तक द इटरनल सन द लेजसी ऑफ सूय देवा पर भी चर्चा की गयी। इस मौके पर लेखिका शालिनी मोदी ने बताया कि इस तरह के संवाद उन्हांने देश के विभिन्न शहरों में किए और पहली बार मसूरी में कर रही हूं। यहां पर खेतान फाउंडेशन के माध्यम से संवाद किया गया जिसमें स्ट्रोलॉजी, माइथोलॉजी पर चर्चा की, वहीं उनकी किताब द लेगजी ऑफ सूर्य देव पर चर्चा की। यह साल न्यूरोलॉजी के हिसाब से सूर्य का साल है इसलिए सूर्य की बात करना जरूरी था। इस संवाद का उददेश्य नई जेनरेशन को कैसे मोटिवेट किया जाय अपने पुराने धार्मिक महत्व को समझने के लिए। नई जेनरेशन संघर्ष के दौर से गुजर रही है उनके कई सवाल होते है, इसी संबध में बात की गयी। उन्होंने कहा कि एआई नई तकनीकि है लेकिन एस्ट्रोलॉजी के हिसाब से यह सही नहीं है, इसमें गलत चीजें सामने आयेगी, एस्ट्रोलॉजी में सामने जो बातें तथ्यों पर होती है वह एआई के माध्यम से नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि एस्ट्रोलॉजी किसी भी मनुष्य के बारे में तथ्यपूरक बताती है किसी का समय खराब होता है तो उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए। अगर अच्छा है तो उसका लाभ किस तरह लिया जाय यह बताती है। उन्होंने कहा कि एस्ट्रोलॉजी के कई विषय है लेकिन मै मेथोलॉजी पर कार्य करती हूं। उन्होंने कहाकि सोशल मीडिया पर कई चीजें आ रही है जो आधा ज्ञान होता है उससे नुकसान हो सकता है अगर तथ्यपरख बाते जाननी है तो एस्ट्रोलॉजर के पास जाना चाहिए, वहीं इसे सीखना भी चाहिए इसके सीखने के कई संस्थान है। इस मौके पर प्रभाखेतान संस्था की अध्यक्ष ईशा गुप्ता ने कहा कि यह चौथा संस्करण है, शालिनी मोदी देश की बड़ी लेखिका व एस्ट्रोलाजर है। मसूरी में फाउंडेश का अच्छा रिसपांस है, संस्था लिटरेचर, आर्ट व कल्चर को प्रमोट करता है, इस मोके पर भी स्थानीय कुजीन को प्रमोट किया गया व भांग जीरे की चटनी कुलथ की दाल के कबाब व झगोंरे की खीर है। संस्था में लेखक, डांसर, आर्टिस्ट आते है जिसमें फाउंडेशन देश भर में उनको आगे बढाने का कार्य करता है उनकी कला को मंच प्रदान करता है। वहीं संस्था मसूरी में पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य कर रही है प्लास्टिक की बोतलों का विरोध करती है, इलेक्ट्रानिक वेस्ट व प्लास्टिक पर जनता को जागरूक करने का कार्य करते है। इस मौके पर निधि बहुगुणा, शशि रावत, अनुपम हांडा, ममता भाटिया, सुरभि अग्रवाल, बीना गुनसोला, विवेक बहुगुणा, रचना शर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में मेथोलॉजी विद माडर्न लाइफ इन रास इन डिवाइन रिलेशनशिप पर संवाद किया। वहीं उनकी नई पुस्तक द इटरनल सन द लेजसी ऑफ सूय देवा पर भी चर्चा की गयी। इस मौके पर लेखिका शालिनी मोदी ने बताया कि इस तरह के संवाद उन्हांने देश के विभिन्न शहरों में किए और पहली बार मसूरी में कर रही हूं। यहां पर खेतान फाउंडेशन के माध्यम से संवाद किया गया जिसमें स्ट्रोलॉजी, माइथोलॉजी पर चर्चा की, वहीं उनकी किताब द लेगजी ऑफ सूर्य देव पर चर्चा की। यह साल न्यूरोलॉजी के हिसाब से सूर्य का साल है इसलिए सूर्य की बात करना जरूरी था। इस संवाद का उददेश्य नई जेनरेशन को कैसे मोटिवेट किया जाय अपने पुराने धार्मिक महत्व को समझने के लिए। नई जेनरेशन संघर्ष के दौर से गुजर रही है उनके कई सवाल होते है, इसी संबध में बात की गयी। उन्होंने कहा कि एआई नई तकनीकि है लेकिन एस्ट्रोलॉजी के हिसाब से यह सही नहीं है, इसमें गलत चीजें सामने आयेगी, एस्ट्रोलॉजी में सामने जो बातें तथ्यों पर होती है वह एआई के माध्यम से नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि एस्ट्रोलॉजी किसी भी मनुष्य के बारे में तथ्यपूरक बताती है किसी का समय खराब होता है तो उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए। अगर अच्छा है तो उसका लाभ किस तरह लिया जाय यह बताती है। उन्होंने कहा कि एस्ट्रोलॉजी के कई विषय है लेकिन मै मेथोलॉजी पर कार्य करती हूं। उन्होंने कहाकि सोशल मीडिया पर कई चीजें आ रही है जो आधा ज्ञान होता है उससे नुकसान हो सकता है अगर तथ्यपरख बाते जाननी है तो एस्ट्रोलॉजर के पास जाना चाहिए, वहीं इसे सीखना भी चाहिए इसके सीखने के कई संस्थान है। इस मौके पर प्रभाखेतान संस्था की अध्यक्ष ईशा गुप्ता ने कहा कि यह चौथा संस्करण है, शालिनी मोदी देश की बड़ी लेखिका व एस्ट्रोलाजर है। मसूरी में फाउंडेश का अच्छा रिसपांस है, संस्था लिटरेचर, आर्ट व कल्चर को प्रमोट करता है, इस मोके पर भी स्थानीय कुजीन को प्रमोट किया गया व भांग जीरे की चटनी कुलथ की दाल के कबाब व झगोंरे की खीर है। संस्था में लेखक, डांसर, आर्टिस्ट आते है जिसमें फाउंडेशन देश भर में उनको आगे बढाने का कार्य करता है उनकी कला को मंच प्रदान करता है। वहीं संस्था मसूरी में पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य कर रही है प्लास्टिक की बोतलों का विरोध करती है, इलेक्ट्रानिक वेस्ट व प्लास्टिक पर जनता को जागरूक करने का कार्य करते है। इस मौके पर निधि बहुगुणा, शशि रावत, अनुपम हांडा, ममता भाटिया, सुरभि अग्रवाल, बीना गुनसोला, विवेक बहुगुणा, रचना शर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

