टीबी रोगियों को समय पर दवा उपलब्ध न होने पर चिंता व्यक्त की।

मसूरी:- टीबी रोगियों के बीच कार्य कर रही संस्था आस की सचिव हेमलता ने टीबी रोगियों के लिए गत तीन माह से दवाइंयो की उपलब्धता न होने पर चिंता प्रकट की है व कहा कि इससे जहा रोगियों को स्वास्थ्य लाभ में परेशानी होगी वहीं जो मेहनत संस्था व अस्पताल टीबी मुक्त भारत के लिए कर रहे हैं उसका प्रयास असफल हो जायेगा।
आस संस्था की सचिव ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नडडा, उत्तराखंड के मख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत, उप महानिदेशक डा. राजेंद्र पी जोशी टीबी विभाग भारत सरकार, टीबी सेल एनएचएम उत्तराखंड, प्रधानमंत्री के सचिव केपी मिश्रा को भी पत्र लिखकर टीबी रोगियों को दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग की है।  टीबी रोगियों को पिछले तीन माह से समुचित दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। आस की सचिव हेमलता बहन ने राज्य को स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत को इस संबंध में चिटठी लिखी है। उन्होंने पत्र में लिखा कि टीबी मुक्त भारत के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार अभियान चला रही है, लेकिन एसे में टीबी रोगियों को समुचित दवाइयां उपलब्ध न हो पाना हैरान करने वाला है। ऐसे में भारत टीबी मुक्त कैसे हो पायेगा। उन्होंने कहा कि आस संस्था विगत दो दशकों से टीबी रोगियों की बेहतरी के लिए कार्य कर रही है, अगर समय से दवा नहीं मिलेगी तो उनकी मेहनत पर पानी फिर जायेगा। उन्होंने बताया कि गत दो वर्षों मे बीच में एक दो माह में टीबी रोगियों को दवा का अभाव आता रहा है और अब तीन माह से दवाईयां नहीं मिल पा रही है, जिससे रोगियों के स्वास्थ्य पर तो प्रभाव पड़ ही रहा है वहीं रोगियों के परिजन चिंतिंत हो रहे हैं।विशेष कर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह बड़ी समस्या बनता जा रहा है। उत्तराखंड में एनटीईपी के तहत मिलने वाली कई दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। पूरी तरह से एनटीईपी पर निर्भर एमडीआर-टीबी रोगियों के दवा न मिलने से और मुश्किल हालात पैदा हो गए हैं। उन्होंने दवा न मिलने की बड़ी वजह खरीद और आपूर्ति श्रंखला प्रबंधन प्रणाली में कमी बताया व इसमें सुधार की जरूरत बताई।