पर्यटक नगरी मसूरी में भी लोग गर्मी से बेहाल, पर्यटन पर पडने लग गया है असर।

मसूरी:-  देश में तपती गर्मी के बावजूद पर्वतों की रानी मसूरी अपने खुशगवार मौसम व ठंडी हवाओं के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी रहती है लेकिन इस बार यहां भी गर्मी ने अपना रंग दिखा ही दिया व सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर मौसम में यह बदलावा आने वाले समय में किसी प्राकृतिक आपदा का संकेत तो नहीं है।
इन दिनों पहाड़ों की रानी मसूरी भी पर्यटकों को गर्मी का एहसास दिला रही है। जिस मसूरी में गर्मी के दिनों में 20 डिग्री सेल्सिय तापमान रहता था, आज वहाँ पारा बत्तीस डिग्री सेल्सियस होने से स्थानीय लोग परेशान है व पर्यटक हैरान हैं। हालांकि इस बार पूरे देश में गर्मी अपना कहर ढा रही है लेकिन यह मसूरी के इतिहास में पहली बार है कि यहां पर भी शीतल हवाओं के झोंके के बजाय गर्म हवाओं के झोंके चल रहे हैं। यह तो गनीमत है कि छाया में बैठने पर गर्मी का अहसास नहीं होता। एक समय मसूरी में कभी पंखे तक नहीं होते थे फ्रिज को दूर की बात थी, लेकिन अब यहाँ पर होटलों व रेस्टोरेंटों में पंखे लग गये हैं व बड़े होटलों में एसी लगा दिए गये है। लेकिन इस बार गर्मी अधिक होने से लोगों के माथे पर चिंता  की लकीरें पड गई  हैं कि आखिर इतनी गर्मी मसूरी के लिए ठीक नहीं है व इसके दुष्परिणाम आने वाले समय में भुगतने होंगे। दोपहर के समय तो बाजारों से रौनक गायब हो रही है व लोग गर्मी से परेशान हो रहे हैं, हालांकि शाम ढलते ही मौसम बदल जाता है व शीतल मंद मंद हवाएं चलने लगती है। गर्मी बढने से सबसे अधिक प्रभाव मजदूरी करने वालों व स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है, गर्मी के चलते स्कूली बच्चे व अभिभावक छाता ओढ कर चलने पर मजबूर हो रहे हैं व बिना कार्य के घर से बाहर नहीं निकल रहे। जब अधिक गर्मी पड़ने लगती हैं तो कभी कभार बारिश होने से मौसम सुहावना हो जाता है लेकिन अगले दिन फिर वहीं गर्मी हो जाती है। अब तो घरों में भी पंखे लगने लगे हैं व फ्रिज तो जरूरी हो गया है। देहरादून में भी गर्मी के रिकार्ड टूट रहे हैं व कई दशकों बाद देहरादून में लू चलने की बात हो रही है। मसूरी के मौसम में गर्मी होने के कई कारण है सबसे बडा कारण यहां के पर्यावरण से खिलवाड़ है, पूरी मसूरी कंक्रीट के जंगल में बदल रही है, पेड व पहाड़ों का लगातार कटान जारी है, कोई भी विभाग अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ईमानदारी से नहीं कर रहा है। बहुमंजिला इमारतें धडल्ले से बन रही हैं, रक्षक ही भक्षक बन गयें हैं।इस संबंध में पर्यावरणविद् और समाजसेवी रेनू पॉल बताती है कि पहले जब गर्मी बढ़ती थी तो बारिश से तापमान में ठंडक पैदा हो जाती थी लेकिन इस बार अंधाधुंध निर्माण और पेड़ों के कटान से मौसम में भारी बदलाव देखा जा रहा है उन्होंने बताया कि वनों में लगने वाली आग से भी तापमान बढ़ा है। इस बार तो बारिश भी कम हो रही है, जाड़ों में बर्फ भी कम पड़ी, अगर आगे भी ऐसा ही रहा तो इसके और दुष्परिणाम देखने को मिलेंगे। अभी भी समय है कि प्रकृति से छेड़छाड बंद करें, पेड़ लगाये व पहाडों का कटान बंद करे। वहीं दूसरी ओर गर्मी बढने का कारण जंगलों में लगी आग के अलावा वाहनों की लगातार बढती संख्या भी है। जिससे वातावरण प्रदूषित हो रहा है व गर्मी बढ रही है, यदि अभी पर्यावरण से छेड़छाड़ बन्द नही हुई तो आनेवाले समय में दुष्परिणाम भुगतने होगें।