मसूरी -संत निरंकारी भवन कैमल बैक रोड़ में 6 वें समर्पण दिवस के अवसर पर सत्संग का आयोजन किया गया ।दिल्ली से आये संत अनिल अरोड़ा ने इस अवसर पर कहा कि निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी महाराज का सम्पूर्ण जीवन त्याग, परोपकार,परहित में समर्पित रहा । उनके जीवन का एक एक पल मानवसेवा में बीता है । हजारों जिंदगी बचाने के लिए लाखों यूनिट रक्तदान कर ‘लहू नालियों में नहीं, नाड़ियों में बहना चाहिए’ यह शिक्षा भी बाबा हरदेव सिंह ने दुनिया को दी । 5 साल पूर्व 13 मई को निरंकारी मिशन के बाबा हरदेव सिंह जी का देहान्त हो गया था , तब से महाप्रयाण तिथि पर निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी की स्मृति में प्रतिवर्ष निरंकारी मिशन समर्पण दिवस के रूप में सत्संग का आयोजन करता है । कोविड के कारण पिछले दो वर्ष यह आयोजन नहीं हो पाया था । दिल्ली से आये संत श्री अरोड़ा ने बाबा हरदेव सिंह के जीवन की अनेक शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पेड़ , हवा, पानी इसीलिए पूज्य व सार्थक हैं क्यूँकि वे दूसरों के काम आते हैं । इसी प्रकार धरती पर जनम तो हर कोई ले लेता मगर जीवन उसी का सफल और सार्थक है जो दूसरों के काम आता है । उन्होंने कहा कि बाबा हरदेव सिंह में बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा थी वे हर दिल में बसते थे। बाल अवस्था से ही बाबा हरदेव परोपकार के कार्य में जुट गये थे और अपना आराम छोड़कर दिनरात सन्त महात्माओं की सेवा में लगे रहते थे । उनके मुख मण्डल की आभा और चेहरे की अद्भुत मुस्कराहट लोगों में खुशी और प्राणवायु भर देती थी । बलिदान दिवस पर रक्तदान शिविर लगाना और मानव जीवन में आयी अनेक त्रासदियों में निंरकारी मिशन का अग्रिम पंक्ति में खड़े रहने की शिक्षा भी हरदेव सिंह महाराज की ही थी । उन्होंने कहा कि यद्यपि सद्गुरू शरीर नहीं ज्ञान ज्योति होती जो आज सदुगुरू माता सुदीक्षा के रूप में मिशन का मार्गदर्शन कर रही है, मगर सद्गुरू अलग अलग समय पर अलग अलग रूप में आकर मानवहित के जो रास्ते बता जाता है उनपर अमल करना सुखदायी होता है । इससे पूर्व निरंकारी अनुयायियों ने बाबा हरदेव सिंह महाराज के अनेक परोपकारों और शिक्षा प्रद घटनाओं का उल्लेख अपने विचारों और गीत प्रस्तुति के माध्यम से किया । सत्संग में बड़ी संख्या में निरंकारी अनुयायी शामिल हुए.