जिम कार्बेट की 150 वीं जयंती मनाकर उनके योगदान को याद किया गया।

मसूरी:- भाजपा मसूरी मंडल ने तिलक लाइब्रेरी में आयोजित कार्यक्रम में महान शिकारी व पशु प्रेमी जिम एडवर्ट कॉर्बेट की 150वीं जयंती मनाई। इस मौके पर कहा गया कि उन्होंने उत्तराखंड सहित देश के अनेक हिस्सों में जाकर आदमखोर बाघों से जनता को मुक्ति दिलायी थी वह मानवतावादी होने के साथ ही लेखक भी थे व मसूरी में उन्होंने कई वर्ष बिताये व उसके बाद नैनीताल चले गये। उनकी उपलब्धियों पर भारत सरकार ने उनके नाम से जिम कार्बेट नेशनल पार्क बनाया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने बताया कि जिम कार्बेट का मसूरी से गहरा संबंध रहा है उनके पिता क्रिटोफर विलियम कार्बेट ब्रिटिश काल में मसूरी में लंढौर पोस्ट आफिस में पोस्ट मास्टर के पद पर तैनात थे व यही पर लंढौर के सेंटपॉल चर्च में 13 अक्टूबर 1959 में उनकी सादी मेरी जेन से हुई थी। बाद में उनके पिता का स्थानांतरण नैनीताल हो गया जहां 1875 में जिम कार्बेट का जन्म हुआ। लेकिन उनके परिवार का मसूरी से नाता नहीं छूटा व वे परिवार के साथ अपने रिश्तेदारों से मिलने लगातार मसूरी आते रहे। उस समय उत्तराखंड के कई हिस्सों में बाघ का आतंक था जिस पर गांव वाले उन्हें बुलाते व बाघों से मुक्ति दिलाते उन्होंने उस समय करीब 133 बाघों का शिकार किया था वहीं अन्य जंगली मानवभक्षी जानवरों को भी मारा था। जिम कार्बेट उन्ही जानवरों को मारते थे जो आदमखोर हो जाते थे। उन्हांने बताया कि वह पशु प्रेमी भी थे व जानवरों से बहुत प्यार करते थे, उन्होंने खुद अपने घर पर एक बाघ को पाला था। उन्होंने इस दौरान कई पुस्तकें भी लिखी जिसमें मैन ईटर कुमांउ, मैन ईटर रूद्रप्रयाग, आदि है व उसमें उन्होंने जानवरों को मारने का कारण भी लिया। बाद में उन्होने हल्द्ववानी में एक गांव गोद लिया व मकान बनाया। जब जिम कार्बेट मसूरी आते थे तो मालरोड पर घूमते थे। उनके उपयोग किए कई बर्तन, लालटेन व उनके द्वारा खींचे गये फोटो व नेगेटिव आज भी मेरे पास सुरक्षित है। वह बहुत अच्छे फोटोग्राफर भी थे। बाद में वह भारत छोड कर चले गये व 1955 में उनकी मृत्यु केन्या में हुई। इस मौके पर भाजपा मसूरी मंडल के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि जिम कार्बेट ऐसे महान इंसान थे जिन्होंने उत्तराखंड को बाघों से मुक्ति दिलायी थी वहीं उन्होंने अनेक ऐसे कार्य किए जिसके कारण उन्हें भारत सरकार ने सम्मान दिया व उनके नाम से जिम कार्बेट नेशनल पार्क बनाया। उन्होंने कहाकि उनकी जयंती मनाने का उददेश्य है कि नई पीढी उनके बारे में जाने कि उन्होंने हमारे देश के लिए कितना कुछ किया। इस मौके पर अनिल गोदियाल, प्रमिला नेगी, उज्जवल नेगी, शिव अरोड़ा, सतीश जुनेजा, गुडडी देवी, कमला थपलियाल, रणजीत िंसह, माधुरी शर्मा, अवतार कुकरेजा, सुषमा रावत, शूरवीर भंडारी, सहित बडी संख्या में लोग मौजूद रहे।