आजादी के संर्घष में मसूरी के योगदान पर गोष्ठी का आयोजन किया गया, इतिहासकार जयप्रकाश उत्तराखंडी ने दी विस्तृत जानकारी।

 

मसूरी:-  मसूरी हेरिटेेज सेंटर की ओर से तिलक लाइब्रेरी में भारत की आजादी के संघर्ष में मसूरी के योगदान पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ताओं ने भारत की आजादी के दौरान मसूरी के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं इस बात को भी स्वीकार किया गया कि मसूरी के विकास में जो योगदान ब्रिटिश काल के दौरान किया गया वह आजाद भारत के इतिहास में नहीं हो पाया।
गोष्ठी में मुख्य वक्ता इतिहासकार व वरिष्ठ पत्रकार जयप्रकाश उत्तराखंडी ने आजादी के आंदोलन में मसूरी के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला व कहा कि उस दौरान मसूरी के तत्कालीन समाज सेवियों ने आजादी के आंदोलन में अहम भूमिका निभाई, तब मसूरी में अधिकतर ब्रिटिश अधिकारी व महाराजा रहते थे लेकिन आजादी के आंदोलन में मसूरी की कई हस्तियों ने योगदान दिया। इस अवसर पर कई विषयों पर चर्चा की गई वहीं देश की आजादी के बाद जब भारत का विभाजन हुआ व पाकिस्तान बना तो मसूरी भी इससे प्रभावित हुई। जब देश में आजादी का आंदोलन तेज होता था तो अंग्रेज अधिकारी मसूरी आकर रहते थे क्योंकि मसूरी सबसे सुरक्षित स्थान था। गोष्ठी में तत्कालीन मसूरी के समाजसेवियों के द्वारा किए गये कार्योे को भी याद किया गया। जिसमें अवगत कराया गया कि गांधी जी ने जब छुआछूत का विरोध किया तो मसूरी में प. मदनमोहन मालवीय ने यहां आकर मंदिर में दलितों का प्रवेश करवाया था लेकिन साथ ही इस बात को याद किया गया कि मसूरी एक ऐतिहासिक शहर है जिसको आज लोग भूलते जा रहे हैं। ब्रिटिश काल में मसूरी का विकास बहुत अधिक तेजी से किया गया क्यो कि मसूरी अग्रेंजों की पसंदीदा जगह थी। उनके विकास का उपयोग आज भी मसूरी वासी कर रहे हैं। जबकि आजादी के बाद मसूरी का विकास इतना नहीं हो पाया। आजादी के आंदोलन में जब महात्मा गांधी यहा आते थे तो मसूरी में ही बैठके करके आंदोलन की रणनीति बनायी जाती थी। जिसमें मोती लाल नेहरू, प. गोविद बल्लभ पंत, सरदार बल्लभ भाई पटेल, जवाहर लाल नेहरू, आचार्य कृपलानी, सरदार बलदेव सिंह, सहित तमाम बडे नेता यहां बैठक में मौजूद रहते थे। तब गांधी के बाद दूसरे बडे नेता अब्बास तैयब भी मसूरी में आते थे जिनके नाम से नारा देश में चलता था कि खरा रूप्पैया चादी का राज तैयब गांधी का। ऐसी अनेक हस्तियों ने मसूरी में रह कर देश की आजादी में योगदान दिया। उस समय मसूरी में सांस्कृतिक, गतिविधियों सहित बडे खेलों आयोजन भी किया जाता था। इस मौके पर कार्यक्रम आयोजक सुरभि अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, बिजेंद्र पुंडीर, शूरवीर भंडारी, राखी, रजत अग्रवाल, जोगेदर सिंह कुकरेजा आदि मौजूद रहे।
इस  अवसर पर मसूरी हैरिटेज सेंटर एवं इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हैरिटेज की ओर से हैरिटेज वॉक भी करवाई गई जो गुरूद्वारा चौक लंढौर से शुरू होकर लंढौर बाजार, घंटाघर, नगर पालिका होते हुए तिलक लाइब्रेरी तक की गई जिसमें लोगों को मसूरी के हैरिटेज भवनों कोहिनूर बिल्डिंग, नगर पालिका, मस्जिद, तिलक लाइब्रेरी आदि व उनके ऐतिहासिक महत्व के बारे में बताया गया।