मसूरी। हिमालयी स्वाद, खुशबू और पाक कला से जुड़ी दवा पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें फ़ूड टेक्नोलॉजी, प्राकृतिक उत्पाद, पारंपरिक ज्ञान की पहल को एक साथ लाया गया। इस मौके पर ऋषिकेश आंस संस्था की सचिव हेमलता दीदी को टीबी रोगियों के स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए उन्हें डा. ओमप्रकाश दुग्गल चेरिटेबल सोसाइटी की ओर से लाइफ टाइम अचीव अवार्ड व गोल्ड मेडल सहित शॉल देकर सम्मानित किया गया।
डॉ. ओम प्रकाश दुग्गल चौरिटेबल सोसाइटी की यूनिट्स मसूरी फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर्स इंस्टीट्यूट और हिमसुरभि अरोमा प्लांट साइंस लिविंग म्यूज़ियम – ने लाइब्रेरी क्षेत्र के दुग्गल विला एस्टेट में दो दिन की वर्कशॉप का आयोजन किया। जिसमें हिमालय की ऊंचाइयां प्राकृतिक फलों के अर्क और प्राकृतिक इत्र में इसके स्वाद और खुशबू का शानदार अनुभव विषय पर चर्चा की गयी। कार्यशाला में हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के फ़ूड टेक्नोलॉजी विभाग के छात्रों के लिए आयोजित की गई थी। इसका मकसद छात्रों को हिमालयी प्राकृतिक स्वाद और खुशबू, फलों से बने अर्क, फर्मेंटेशन, पाक-कला से जुड़ी दवा और प्राकृतिक इत्र बनाने के बारे में प्रैक्टिकल जानकारी देना था। कार्यक्रम का उद्घाटन जनरल मैनेजर कर्नल ए.के. थापा ने बतौर मुख्य अतिथि व जौनपुर की ब्लॉक प्रमुख सीता पंवार ने विशिष्ट अतिथि के रूप में किया। कार्यक्रम में एक्शन फ़ॉर एडवांसमेंट ऑफ़ सोसाइटी की संस्थापक हेमलता दीदी को टीबी रोगियों की सेवा के लिए लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड व गोल्ड मैडल दिया गया। यह सम्मान उन्हें टीबी मरीज़ों की मदद और सामुदायिक सेवाओं में उनके योगदान के लिए दिया गया। इस मौके पर हेमलता दीदी ने कहा कि टीबी रोग का उपचार अब आसान हो गया है यह छूत का रोग नहीं है इसलिए उनसे दूरी न बनाये बल्कि उनका मनोबल बढाये। उन्होंने कहा कि भारत सरकार टीबी रोग से देश को मुक्त करने का अभियान चला रही है व शीघ्र की देश टीबी रोग से मुक्त हो जायेगा। उन्हांेने यह भी कहा कि टीबी रोगी को प्रोत्साहित करने व पोषाहार देने की जरूरत होती है जिससे वह शीघ्र ठीक हो जाता है। इस मौके पर सू ग्राहम कलिनरी मेडिसिन गैलरी को सू ग्राहम की याद में समर्पित किया गया। जिसके लिए निक्की ग्राहम ने एक यादगार प्रस्तुति दी। यह गैलरी बीमारियों से उबरने के लिए प्रकृति से इलाज थीम पर आधारित है और इसे हॉ हम इसे खत्म कर सकते हैं पहल के साथ पेश किया गया। टेक्निकल सेशन में भोजन, वेलनेस, म्यूज़ियम आउटरीच और प्राकृतिक उत्पाद विकास के अलग-अलग पहलुओं के बारे में प्रैक्टिकल और जानकारीपूर्ण अनुभव प्रदान किए गए। डॉ. वी. के. वार्ष्णेय ने फर्मेंटेड किण्वित खाद्य पदार्थों और गट आंतो) को ठीक करने में उनकी भूमिका पर एक सेशन आयोजित किया; डॉ. जी. एस. रौतेला ने म्यूज़ियम आउटरीच सेशन का नेतृत्व किया; डॉ. रवींद्र मारवाह और अशोक महेंद्रू ने फलों और बेरीज़ का इस्तेमाल करके हिमालयी अमृत बनाने पर एक प्रैक्टिकल सेशन आयोजित किया; और डॉ. ज्योति मारवाह ने नेचुरल ऑयल-ऑन-ऑयल परफ्यूम डिज़ाइन करने पर एक सेशन आयोजित किया। कार्यशाला का प्रथम सत्र पारंपरिक ज्ञान, वैज्ञानिक खाद्य तकनीक, प्राकृतिक उत्पाद विकास और उद्यमिता को जोड़ने पर ज़ोर देते हुए समाप्त हुआ, साथ ही छात्रों को हिमालयी क्षेत्र के बेहतरीन स्वाद और खुशबू की क्षमता का प्रैक्टिकल अनुभव भी कराया गया।
डॉ. ओम प्रकाश दुग्गल चौरिटेबल सोसाइटी की यूनिट्स मसूरी फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर्स इंस्टीट्यूट और हिमसुरभि अरोमा प्लांट साइंस लिविंग म्यूज़ियम – ने लाइब्रेरी क्षेत्र के दुग्गल विला एस्टेट में दो दिन की वर्कशॉप का आयोजन किया। जिसमें हिमालय की ऊंचाइयां प्राकृतिक फलों के अर्क और प्राकृतिक इत्र में इसके स्वाद और खुशबू का शानदार अनुभव विषय पर चर्चा की गयी। कार्यशाला में हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के फ़ूड टेक्नोलॉजी विभाग के छात्रों के लिए आयोजित की गई थी। इसका मकसद छात्रों को हिमालयी प्राकृतिक स्वाद और खुशबू, फलों से बने अर्क, फर्मेंटेशन, पाक-कला से जुड़ी दवा और प्राकृतिक इत्र बनाने के बारे में प्रैक्टिकल जानकारी देना था। कार्यक्रम का उद्घाटन जनरल मैनेजर कर्नल ए.के. थापा ने बतौर मुख्य अतिथि व जौनपुर की ब्लॉक प्रमुख सीता पंवार ने विशिष्ट अतिथि के रूप में किया। कार्यक्रम में एक्शन फ़ॉर एडवांसमेंट ऑफ़ सोसाइटी की संस्थापक हेमलता दीदी को टीबी रोगियों की सेवा के लिए लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड व गोल्ड मैडल दिया गया। यह सम्मान उन्हें टीबी मरीज़ों की मदद और सामुदायिक सेवाओं में उनके योगदान के लिए दिया गया। इस मौके पर हेमलता दीदी ने कहा कि टीबी रोग का उपचार अब आसान हो गया है यह छूत का रोग नहीं है इसलिए उनसे दूरी न बनाये बल्कि उनका मनोबल बढाये। उन्होंने कहा कि भारत सरकार टीबी रोग से देश को मुक्त करने का अभियान चला रही है व शीघ्र की देश टीबी रोग से मुक्त हो जायेगा। उन्हांेने यह भी कहा कि टीबी रोगी को प्रोत्साहित करने व पोषाहार देने की जरूरत होती है जिससे वह शीघ्र ठीक हो जाता है। इस मौके पर सू ग्राहम कलिनरी मेडिसिन गैलरी को सू ग्राहम की याद में समर्पित किया गया। जिसके लिए निक्की ग्राहम ने एक यादगार प्रस्तुति दी। यह गैलरी बीमारियों से उबरने के लिए प्रकृति से इलाज थीम पर आधारित है और इसे हॉ हम इसे खत्म कर सकते हैं पहल के साथ पेश किया गया। टेक्निकल सेशन में भोजन, वेलनेस, म्यूज़ियम आउटरीच और प्राकृतिक उत्पाद विकास के अलग-अलग पहलुओं के बारे में प्रैक्टिकल और जानकारीपूर्ण अनुभव प्रदान किए गए। डॉ. वी. के. वार्ष्णेय ने फर्मेंटेड किण्वित खाद्य पदार्थों और गट आंतो) को ठीक करने में उनकी भूमिका पर एक सेशन आयोजित किया; डॉ. जी. एस. रौतेला ने म्यूज़ियम आउटरीच सेशन का नेतृत्व किया; डॉ. रवींद्र मारवाह और अशोक महेंद्रू ने फलों और बेरीज़ का इस्तेमाल करके हिमालयी अमृत बनाने पर एक प्रैक्टिकल सेशन आयोजित किया; और डॉ. ज्योति मारवाह ने नेचुरल ऑयल-ऑन-ऑयल परफ्यूम डिज़ाइन करने पर एक सेशन आयोजित किया। कार्यशाला का प्रथम सत्र पारंपरिक ज्ञान, वैज्ञानिक खाद्य तकनीक, प्राकृतिक उत्पाद विकास और उद्यमिता को जोड़ने पर ज़ोर देते हुए समाप्त हुआ, साथ ही छात्रों को हिमालयी क्षेत्र के बेहतरीन स्वाद और खुशबू की क्षमता का प्रैक्टिकल अनुभव भी कराया गया।

