नासवी ने पालिका अधिशासी अधिकारी को पत्र भेजकर वेंडर्स की समस्याओं के समाधान की मांग की।

मसूरी। नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स ऑफ इंडिया नासवी ने नगर पालिका परिषद मसूरी के अधिशासी अधिकारी को पत्र भेज कर मसूरी के स्ट्रीट वेंडरों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की है ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो, हाल की घटनाओं व उनके भरण पोषण की समस्या पर नासवी गहरी चिंता व्यक्त करता है।
नासवी के कोषाध्यक्ष कमलेश कुमार उपाध्याय की ओर से पालिका अधिशासी अधिकारी को लिखे पत्र में कहा गया है कि मसूरी में रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के जीवन और उनकी आजीविका को प्रभावित करने वाले हालिया घटनाक्रमों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं। माल रोड को नो-वेंडिंग जोन घोषित करने और स्ट्रीट वेंडर्स की बेदखली के बाद से लगभग 280 विक्रेता अत्यंत दयनीय स्थिति में पहुंच गए हैं। ये विक्रेता वर्तमान में अपने परिवारों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में भी असमर्थ हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सुविधाएं तो दूर की बात है। यह अत्यंत गंभीर विषय है कि इन परिस्थितियों के कारण कुछ लोगों की जान भी जा चुकी है और स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इस संदर्भ में मांग की जाती है कि माल रोड पर वेंडिंग की बहाली की जाय व स्ट्रीट वेंडर्स को माल रोड पर उनके पुराने स्थानों पर व्यापार करने की अनुमति दी जाय, उनकी बेदखली के बाद, उसी क्षेत्र का उपयोग अब बड़े दुकानों और होटलों द्वारा पार्किंग के रूप में किया जा रहा है। लाखों पर्यटकों के आगमन और बड़े व्यापारियों व होटल श्रृंखलाओं की उपस्थिति के बावजूद, केवल स्ट्रीट वेंडर्स को हटाया जाना अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के प्रति भेदभाव को दर्शाता है। वास्तविक स्ट्रीट वेंडर्स की पहचान के लिए वर्तमान में लागू किए जा रहे मनमाने और अनुचित मानदंडों को समाप्त किया जाए। पहचान की प्रक्रिया स्ट्रीट वेंडर्स आजीविका का संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग का विनियमन अधिनियम, 2014 और उत्तराखंड सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार होनी चाहिए। नासवी एक निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से वास्तविक विक्रेताओं की पहचान करने में अपना पूर्ण सहयोग देने के लिए तैयार है। टाउन वेंडिंग कमेटी का पुनर्गठन किया जाय, जिससे इस पर उठ रहे विवाद समाप्त हो सकें। टीवीसी का पुनर्गठन अधिनियम के प्रावधानों और प्रासंगिक नियमों के अनुसार सख्ती से किया जाए। मांग करते हैं कि कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी भी स्ट्रीट वेंडर को बेदखल न किया जाए। इसमें अधिनियम के तहत अनिवार्य एक महीने का पूर्व नोटिस और उचित जब्ती सूची जारी करना शामिल है। पत्र में उम्मीद की गयी कि नगर पालिका इस मानवीय संकट की गंभीरता को समझेंगी और इन गरीब श्रमिकों को न्याय दिलाने हेतु त्वरित कदम उठाएंगे। पत्र की प्रतिलिपि प्रदेश के मुख्यमंत्री, एसडीएम मसूरी, विधायक गणेश जोशी, पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी, सचिव शहरी विकास संयुक्त सचिव आवास एवं शहरी मामले भारत सरकार, पालिका सभासद गीता कुमाई, नासवी के कार्यकारणी सदस्य संजय चोपड़ा, व वेडर जोन के सचिव गोविंद नौटियाल को प्रेषित की गयी है।