मसूरी। श्री सनातन धर्म संस्कृत उत्तर मध्यमा विद्यालय लण्ढ़ौर मसूरी में संस्कृत सप्ताह के षष्ठ दिवस का आचरण कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रसूक्त, स्वस्तिवाचन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गयी।
संस्कृत सप्ताह के तहत श्री सनातन धर्म संस्कृत उत्तर मध्यमा विद्यालय लंढौर मसूरी में छठवें दिन छात्रों ने युगल नृत्य और लोकनृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियां दी । विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने संस्कृत भाषा के साथ भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति उनकी रुचि को प्रदर्शित किया। मुख्य अतिथि संस्कृत भारती के प्रांत कुटुंब शिक्षण प्रमुख नागेंद्र व्यास ने अपने वक्तव्य में कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति और परंपरा का आधार है। संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाकर ही भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी से प्रभावी रूप से जोड़ा जा सकता है। डॉ. प्रदीप सेमवाल ने संस्कृत भारती के कार्यों एवं गतिविधियों का परिचय देते हुए कहा कि संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाना आवश्यक है। उन्होंने संस्कृत को सरल एवं व्यवहारोपयोगी रूप में जनसामान्य तक पहुंचाने पर जोर दिया। डॉ. नवीन जसौला ने अपने वक्तव्य में संस्कृत शिक्षण और श्लोकों के अभ्यास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत के नियमित अध्ययन से भाषा के प्रति रुचि विकसित होने के साथ भारतीय संस्कारों और परंपराओं की समझ भी मजबूत होती है। धीरज मैठाणी ने संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा दैनिक जीवन में इसके प्रयोग का आह्वान करते हुए कहा कि संस्कृत को केवल विद्यालयों और संस्थानों तक सीमित न रखकर समाज के सामान्य व्यवहार का हिस्सा बनाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों ने विभिन्न शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में परिभाग किया जिसमें निबंध प्रतियोगिता में हिमांशु नौटियाल, सुशील नौटियाल एवं रोहन ने श्रेणीनुसार सहभागिता की। भाषण प्रतियोगिता में षोडशसंस्कारा विषय पर सुशील नौटियाल, अनुज भट्ट एवं सूरज नौटियाल ने अपने विचार प्रस्तुत किए। वर्णाश्रमव्यवस्था विषय पर भी विद्यार्थियों ने भाषण प्रस्तुत किए। प्रधानाचार्या मीनाक्षी चौहान ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अपने वक्तव्य में संस्कृत के अध्ययन एवं संरक्षण को भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा की रक्षा के लिए आवश्यक बताते हुए विद्यार्थियों को संस्कृत के अधिकाधिक प्रयोग के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में समस्त अध्यापक, अध्यापिका, कर्मचारी व छात्र उपस्थित रहें।
संस्कृत सप्ताह के तहत श्री सनातन धर्म संस्कृत उत्तर मध्यमा विद्यालय लंढौर मसूरी में छठवें दिन छात्रों ने युगल नृत्य और लोकनृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियां दी । विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने संस्कृत भाषा के साथ भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति उनकी रुचि को प्रदर्शित किया। मुख्य अतिथि संस्कृत भारती के प्रांत कुटुंब शिक्षण प्रमुख नागेंद्र व्यास ने अपने वक्तव्य में कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति और परंपरा का आधार है। संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाकर ही भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी से प्रभावी रूप से जोड़ा जा सकता है। डॉ. प्रदीप सेमवाल ने संस्कृत भारती के कार्यों एवं गतिविधियों का परिचय देते हुए कहा कि संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाना आवश्यक है। उन्होंने संस्कृत को सरल एवं व्यवहारोपयोगी रूप में जनसामान्य तक पहुंचाने पर जोर दिया। डॉ. नवीन जसौला ने अपने वक्तव्य में संस्कृत शिक्षण और श्लोकों के अभ्यास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत के नियमित अध्ययन से भाषा के प्रति रुचि विकसित होने के साथ भारतीय संस्कारों और परंपराओं की समझ भी मजबूत होती है। धीरज मैठाणी ने संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा दैनिक जीवन में इसके प्रयोग का आह्वान करते हुए कहा कि संस्कृत को केवल विद्यालयों और संस्थानों तक सीमित न रखकर समाज के सामान्य व्यवहार का हिस्सा बनाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों ने विभिन्न शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में परिभाग किया जिसमें निबंध प्रतियोगिता में हिमांशु नौटियाल, सुशील नौटियाल एवं रोहन ने श्रेणीनुसार सहभागिता की। भाषण प्रतियोगिता में षोडशसंस्कारा विषय पर सुशील नौटियाल, अनुज भट्ट एवं सूरज नौटियाल ने अपने विचार प्रस्तुत किए। वर्णाश्रमव्यवस्था विषय पर भी विद्यार्थियों ने भाषण प्रस्तुत किए। प्रधानाचार्या मीनाक्षी चौहान ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अपने वक्तव्य में संस्कृत के अध्ययन एवं संरक्षण को भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा की रक्षा के लिए आवश्यक बताते हुए विद्यार्थियों को संस्कृत के अधिकाधिक प्रयोग के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में समस्त अध्यापक, अध्यापिका, कर्मचारी व छात्र उपस्थित रहें।

