बेरोजगारी का दंश झेल रहे गोल्फकार्ट संचालकों ने तीन दिवसीय भूख हड़ताल शुरू की।

मसूरी। गत छह माह से गोल्फकार्ट संचालन नगर पालिका द्वारा बंद किए जाने से भुखमरी का दंश झेल रहे गोल्फकार्ट संचालकों ने सुनवाई न होने पर मजबूर होकर नगर पालिका व प्रशासन के विरोध में तीन दिवसीय 72 घंटे की भूख हड़ताल शहीद स्थल पर शुरू कर दी है।
शहीद स्थल पर गोल्फकार्ट संचालकों ने पालिका व प्रशासन के खिलाफ मजदूर संघ के बैनर तले तीन दिवसीय भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जिसमें मजदूर संघ अध्यक्ष रणजीत सिंह सहित वीरेंद्र सिंह डुंगरियाल व राजेश प्रसाद भूख हड़ताल पर बैठे है व उनके समर्थन में विजय सिंगवान, शंकर मिंया, लख्खी लाल, दाता राम आदि धरना दे रहे है। इस मौके पर एसडीएम को ज्ञापन भी दिया गया जिसमें कहा गया है कि जब तक गोल्फकार्ट संचालकों की समस्या का समाधान नहीं किया जाता तो तीन दिन हड़ताल जारी रहेगी। उसके बाद भी अगर समाधान नहीं होता तो अनिश्चित कालीत भूख हड़ताल शुरू की जायेगी। ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2025 में पालिका प्रशासन ने प्रस्ताव पास कर 14 गोल्फकार्ट आवंटित की थी, लेकिन उसके बाद गोल्फकार्ट का पंजीकरण व इश्योरेंश नहीं किया गया, मांग की गयी कि शीघ्र पंजीकरण व इंश्योरेंस किया जाय व बेरोजगार को चुके गोल्फकार्ट संचालकों को रोजगार मिल सके। वहीं मांग की कि वर्ष 2024-25 में बनी सपूर्ण साइकिल रिक्शा श्रमिकों के लिए बनायी गयी पुनर्वास योजनाको शीघ्र अमल में लाया जाय व इसकी समीक्षा की जाय ताकि सभी को योजना का लाभ मिल सके। इस मौके पर भूख हड़ताल पर बैठे मजदूर संघ अध्यक्ष रणजीत सिंह ने कहा कि गोल्फकार्ट संचालकों को पालिका प्रशाासन व नगर प्रशासन की मजदूर विरोधी नीति के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठना पड़ रहा है, रिक्शा पुनर्वास नीति के तहत आंवटित की गयी गोल्फकार्ट का संचालन पूर्व की भांति किया जाय, उनका पंजीकरण व इंश्योरेंस किया जाय, व शेष बचे 107 रिक्शा श्रमिकों का पुनर्वास किया जाय। वहीं कहा कि भारत सरकार के उपक्रम सीआरसी फंड से रिलीज तीन करोड़ 36 लाख रूपये की योजना को मजदूर हितों में उतारा जाय, ताकि रिक्शा श्रमिक वर्तमान तकनीकि का लाभ ले सकें व श्रमक्षति से बच सकें तथा उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके, मांग की गयी कि बेकरी हिल कार पार्किग पूर्व की भांति हाथ रिक्शा उन्मूलन के तहत मजदूर संघ को दी जाय। उन्हांेने कहा कि लगातार वह एसडीएम, पालिका प्रशासन व जिलाधिकारी के पास गये लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गयी हाल यह है कि छह माह से बेरोजगार हो चुके गोल्फकार्ट श्रमिक अब परिवार का पोषण करने, किराया देने व बच्चों की फीस देने में भी असमर्थ हो चुके है। जबकि गोल्फकार्ट से हो रही आय पालिका को दी गयी।