पत्रकारिता समाज का दर्पण लेकिन दायित्व निर्वहन में उतनी ही चुनौतियां।

मसूरी:-  हिंदी पत्रकारिता दिवस पर मसूरी प्रेस क्लब में गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें पत्रकारों ने हिन्दी पत्रकारिता के 198 स्वर्णिम वर्ष पूरे होने पर एक दूसरों को बधाई दी। इस मौके पर पत्रकारों ने कहा कि जिस जिम्मेदारी से पत्रकार समाज को दिशा दिखाता है व चुनौतियों का सामना करते हुए अपने दायित्व का निर्वहन करता है वहीं उनको सरकार व समाज से वह सम्मान नहीं मिलता जिसके वे हकदार होते हैं।
मसूरी प्रेस क्लब सभागार में पत्रकारिता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रेस क्लब अध्यक्ष सुनील सिलवाल ने कहा कि 198 वर्ष पूर्व आज ही के दिन प. जुगल किशोर शुक्ल ने बंगाल में उदंड मार्तण्ड समाचार प्रकाशित किया था तब से हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। पहले पत्रकारिता मिशन व जुनून था कि समाज के लिए कुछ लिखना है समाज के लिए कुछ करना है लेकिन आज समाज बदल चुका है आर्थिक उदारीकरण का दौर चल रहा है ऐसे में पत्रकारिता करना चुनौती भरा हो गया है। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार शूरवीर सिंह भंडारी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने दो शताब्दी में अनेक उतार चढाव देखे, पहले देश की आजादी के लिए पत्रकारिता ने अपना अहम योगदान दिया, पत्रकारों को ब्रिटिश सरकार के जुल्म सहने पड़े, जबकि तत्कालीन पत्रकारिता ने समाज की बुराइयों को समाप्त करने में अहम भूमिका निभाई लेकिन अब पत्रकारिता रोजगार का साधन बन गया है समाज आज भी पत्रकारों से अपेक्षा रखता है कि वे जन हित में लिखेगें। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को लोकतंत्र में चौथे स्तंभ का दर्जा दिया गया है लेकिन संवैधानिक अधिकार नहीं है। इस मौके पर मसूरी प्रेस क्लब के महासचिव सूरत सिंह रावत ने कहा कि पत्रकारिता समाज का दर्पण होता है इसमें चुनौतियां बहुत है लेकिन उसके बावजूद पत्रकारों को अपने दायित्व का निर्वहन मर्यादा बना कर करना चाहिए जिससे समाज में सकारात्मक संदेश जाये। इस अवसर पर बिजेंद्र पुंडीर, हरीश कालरा, मोहसिन तन्हा, नरेश नौटियाल, दीपक रावत, तान्या सैली, अमित गुप्ता, धमेंद्र धाकड़, राजवीर रौछेला, आशीष भटट, आदि मौजूद रहे।