गुरू नानक स्कूल में गुरुवाणी के ज्ञान की रोशनी में नहाने श्रद्धालु।

मसूरी:-  गुरु नानक फिफ्थ सैंटनरी स्कूल में दो दिवसीय जप -तप समागम एवं सुमिरन साधना का भव्य आयोजन किया गया। विद्यालय के सभागार में आयोजित विशाल आध्यात्मिक समागम में श्रद्धालुओं की अपार भीड उमड़ पड़ी। दिन भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। पूरा परिसर भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया।
जपतप समागम समारोह में देश भर से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। समारोह के मुख्य अतिथि पंजाब के लुधियाना से आए गुरमत प्रचारक कथावाचक तथा महान कीर्तनीय भाई गुरु शरण सिंह ने अपने साथियों के साथ आकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम के आरंभ में छात्र-छात्राओं ने जपु जी साहिब का पाठ किया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने आवो सजना हो देख दर्शन तेरा राम शबद का गायन किया। तत्पश्चात पंजाबी विभाग अध्यक्ष सरदार हरप्रीत सिंह ने मुख्य अतिथि का परिचय देते हुए उनका अभिनंदन किया। भाई गुरु शरण सिंह ने पूरे भारत से यहां पहुंची संगत को भजन कीर्तन के द्वारा गुरु चरणों से जोड़ा। उनके शबद गायन की संगीतमय मंत्र शक्ति से उपस्थित जनसमूह गहरे भाव में लीन होकर असीम आनंद की अनुभूति में डूब गये ,जिसने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। उन्होंने गुरु नानक देव जी के तीन मूल आदर्श कर्म करना, नाम जपना और बांटना की महिमा पर बल दिया। उन्होंने बताया कि प्रभु के नाम में इतनी शक्ति है कि उनका नाम जपने मात्र से इंसान आवागमन के चक्र से छूट मोक्ष को प्राप्त हो जाता है उसके जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। गुरु नानक देव जी की वाणी हमें सिखाती है कि सच्चा धर्म सेवा, सच्चाई और विनम्रता में है अतः आप सभी अपने जीवन में नाम सिमरन, सेवा और सत्संग को स्थान दें। यही आपके उज्जवल भविष्य की नींव है। सच्चा विकास केवल भौतिक नहीं बल्कि आत्मिक उन्नति में निहित है। जब मन शांत होता है तभी समाज स्वस्थ व समृद्ध बनता है। जब हम भीतर की रोशनी से जुड़ते हैं तभी बाहर का अंधकार मिटता है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की हजूरी में सजाए गए दीवान में संगत ने गुरबाणी का जाप किया। यह सिखाता है कि शिक्षा केवल किताबों से नहीं, आत्मा की जागरूकता से भी होती है। गुरु नानक स्कूल में शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं बल्कि बालकों के आध्यात्मिक विकास से है क्योंकि विद्यालय श्री शिक्षा का मंदिर है और गुरबाणी वंदना का सशक्त साधन है। वाहे गुरु के नाम के जप से आत्मा शुद्ध होती है और मानव में दिव्य ऊर्जा का संचरण होता है। इस अवसर पर बच्चे ,युवा एवं वृद्ध सभी में एक नई ऊर्जा एवं उत्साह का संचार देखा जा सकता था। ऐसे आयोजन से सभ्य समाज को ब्रह्म ज्ञान की दिव्य रोशनी द्वारा अध्यात्म से जोड़ा जा रहा है जिसका जीवंत उदाहरण, दिव्य संत समागम है। कार्यक्रम के अंत में अरदास हुई व  हुकुनामा लिया गया तथा प्रसाद वितरण द्वारा कार्य समापन किया गया। वहीं कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रातः 3 बजे ब्रह्म मुहूर्त में समस्त संगत एवं विद्यार्थीगण सभागार में भाई गुरुशरण जी की अमृतवाणी का रसापान किया। अंत में गुरु नानक फिफ्थ सैंटनरी स्कूल संस्था के सचिव सरदार महेंद्र पाल सिंह ने भाई गुरु शरण साहब और संगत को अपने विद्यालय में आने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने भाई गुरु शरण के विश्व स्तर पर किए जा रहे समाज सेवा के कार्यों से संगत को अवगत कराया। सरदार महेंद्र पाल सिंह ने विद्यालय की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह, पेंटिंग एवं शाल भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर गुरु नानक फिफ्थ सैंटनरी स्कूल समिति के सचिव सरदार महेंद्र पाल सिंह, सदस्या सरदारनी जसबीन कौर, सरदार परमजीत सिंह, सरदारनी गुरिंदर कौर, प्रधानाचार्य अनिल तिवारी, प्रशासनिक अधिकारी सुनील बक्शी, प्रधान अध्यापक कुलदीप सिंह त्यागी, विद्यालय के समस्त शिक्षक, छात्र- छात्राओं सहित पंजाब ,हरियाणा, दिल्ली, देहरादून, महाराष्ट्र व अन्य क्षेत्रों से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे।