मसूरी। गुरु नानक 5th सेंटेनरी स्कूल में जप तप का भव्य समागम का आयोजन किया गया। समागम के प्रथम सत्र में सुखमनी साहिब का पाठ किया गया व विद्यालय के शिक्षक तथा शिक्षिकाओं ने ’मिल मेरे प्रीतमा जिओ’ शबद का गायन किया। जिससे सभागार का संपूर्ण वातावरण भक्तिमय और शांतिपूर्ण बन गया।
दूसरे सत्र अमृतवेला में सिमरन साधना से आशीर्वादी भूमिका निभाते हुए मनजोत सिहंह ने अपने अमूल्य वचनो से तथा जाप के प्रत्येक स्वर में भक्ति, समर्पण और आध्यात्मिक ऊर्जा का अदभुत समन्वय से सम्पूर्ण सभागार ईश्वरके नाम में लीन हो गया। मूलमंत्र जप तप का कार्यक्रम भाई गुरशरण के प्रेरणादाई सानिध्य में आयोजित हुआ। आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत वातावरण में कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर भाई गुरशरण का स्वागत गुरु नानक फिफ्थ सैंटनरी स्कूल समिति के सचिव सरदार एम.पी. सिंह, गुरु नानक फिफ्थ सैंटनरी स्कूल के प्रबंध समिति के सदस्या सरदारनी जैस्मीन कौर, विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल तिवारी, हेड मास्टर कुलदीप सिंह त्यागी तथा गुरु नानक फिफ्थ सेंटेनरी स्कूल के प्रशासनिक अधिकारी सुनील बक्शी, सरदार परमजीत सिंह, सरदारनी गुरिंदर कौर और मसूरी पालिका के पूर्व अध्यक्ष तथा मसूरी और देहरादून के अन्य स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों ने किया। भाई गुरशरण सिंह ने अपने प्रवचन में प्रेम, शांति और भाईचारे का अद्भुत संदेश दिया। उन्होंने बताया कि सच्ची आराधना किसी एक पूजा पद्धति में नहीं होती बल्कि अच्छे विचारों और अच्छे कर्मों से होती है। यह समागम केवल एक कार्यक्रम नहीं वरन् आत्मा को शांति देने वाला तथा जीवन को दिशा देने वाला एक आध्यात्मिक संगम है। हमें यह याद रखना चाहिए कि वास्तविक खुशी बाहर की वस्तुओं में नहीं वरन हमारे विचारों और कर्मों में होती है। भाई गुरशरण ने ’चौपई साहब’ की बानी, जो गुरु गोविंद सिंह द्वारा रचित पांच बनियों में से एक है की महत्वता ,अखंड परमात्मा की समस्त शक्ति के सम्मुख नमन किया तथा समस्त मानव प्राणों की रक्षा की प्रार्थना की। अंत में ’चौपई साहिब’ के पाठ की अरदास की गई। ’अनंद साहिब’का पाठ किया गया। प्रसाद वितरण किया गया। तीसरे सत्र में संपूर्ण शांति एवं निर्मल वातावरण में साधना का आरंभ हुआ, भाई गुरशरण के अमृत स्वर ब्रह्म मुहूर्त में एक सात्विक आभा वातावरण में विकीर्ण कर रहे थे। दो-तीन घंटे तक शुद्ध एवं सात्विक वातावरण में विचरण करते ध्यान साधना का कार्यक्रम संपन्न हुआ। भाई गुरशरण ने गुरमत विचार प्रकट करते हुए कहा कि मनुष्य का जन्म ही अपने धर्म का पालन करते हुए, जप तप करके सेवा और सिमरन करते हुए ईश्वर की प्राप्ति के लिए होता है। मनुष्य के जीवन का यह परम लक्ष्य होना चाहिए कि वह अपने जीवन में ईश्वर की आराधना करता रहे। गुरबानी का पाठ करता रहे तथा ईश्वर का स्मरण करता रहे। सिमरन करता रहे। गुरु नानक फिफ्थ सैंटनरी स्कूल के सचिव सरदार एमपी. सिंह ने तथा सरदारनी जसवीर कौर ने गुरशरण को स्मृति चिन्ह, दुशाला भेंट करके उनका सम्मान किया तथा समस्त जत्थे के प्रत्येक सदस्य को को एक स्मृति चिन्ह भेंट स्वरूप प्रदान किया।ै कार्यक्रम के अंत में ’अनंद साहिब’ का पाठ किया गया। अरदास की गई तथा हुकुम नाम लिया गया। प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर गुरु नानक फिफ्थ सैंटनरी स्कूल की समिति के सचिव सरदार एमपी. सिंह ने सभागार में उपस्थित अतिथियों सहयोगकर्ताओं तथा संगत के प्रति आभार व्यक्त किया।

