मसूरी। तिलक लाइब्रेरी में स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक व चंद्रशेखर आजाद की जयंती मनाई गयी। इस मौके पर बाल गंगाधर तिलक व चंद्रशेखर आजाद के चित्र पर पुष्पाजंलि अर्पित कर उनको श्रद्धांजलि दी गयी व मुख्य अतिथि प्रधानाचार्य महात्मा योगेश्वर सरस्वती शिशु मंदिर डा. मनोज रयाल व अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर जयंती पर अपने विचार व्यक्त किये व उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आहवान किया।
तिलक लाइब्रेरी में आयोजित बाल गंगाधर तिलक व चंद्रशेखर आजाद की जयंती के अवसर पर मुख्य अतिथि डा. मनोज रयाल ने कहा कि भारत देश प्राचीन देश है, जिसमें विश्व की सभी संस्कृति व सभ्यता को एक सूत्र में पिरोने का कार्य देश के सपूतों ने किया है। इतिहास बताता है कि यह देश चार युगों से चलता आ रहा है, जिसमें किसी न किसी ने समाज को दिशा देने का कार्य किया है, भगवान राम व कृष्ण इसमें एक थे। इसी कड़ी में बाल गंगाधर तिलक जहां महान स्वतंत्रता सेनानी थे वहीं वह पहले एक शिक्षक थे, उन्होंने कहा कि देश का आंदोलन तभी सफल होगा जब देश शिक्षित होगा, उन्होंने कहा था कि स्वतंत्रता तो सबसे बडी है लेकिन आजादी की प्रेरणा, बलिदान का गुण शिक्षा से आयेगा। विश्व में जितने भी बदलाव हुए है उसमें शिक्षकों की अहम भूमिका रही है। उन्होंने देश की आजादी के लिए विभिन्न, समाचार पत्र निकाले, धर्म को शामिल किया व समाज में परिवर्तन लाने का कार्य किया व देश की आजादी में अहम योगदान दिया। वहीं चंद्रशेखर आजाद के बारे में कहा कि देश की आजादी में गरम व नरम दल थे जिसमें चंद्रशेखर गरम मिजाज के थे जिन्होंने कहा कि बिना संर्घष के देश आजाद नहीं हो सकता। हम भगवान राम व कृष्ण के वंशज हैं, जिसमें राम ने मयार्दा का पाठ पढाया लेकिन कृष्ण ने कहा था कि अपने शत्रुओं के नाश के लिए हथियार उठाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद 15 वर्ष के थे, जब उन्हें पकडा गया तो उन्होंने न्यायाधीश से कहा कि मै स्वतंत्रता का पुत्र हूं व मेरा नाम आजाद है व अंत तक इसी प्रेरणा से शहीद हुए। इस मौके पर मसूरी गर्ल्स इंटर कालेज की पूर्व उप प्रधानाचार्या संतोष आर्य ने कहा कि तिलक कुशाग्र बुद्धि के थे व लॉ करने के बाद देश की आजादी में कूदे व आजादी के लिए गीता, धर्म ग्रंथों, गणेश उत्सव को साधन बनाया व शिक्षा पर जोर दिया व कहा कि अंग्रेज आजादी उपहार में नही देंगे इसके लिए संर्घष किया व कहा कि जब वीर शिवाजी एक छोटी सेना को लेकर अंग्रेजों का सामना कर सकते हैं तो हमारा पूरा देश है व देश आजाद हुआ। ऐसे लोगों से प्रेरणा लेकर देश को आगे बढा सकते है, वहीं चंद्रशेखर आजाद पूरे देश में आजादी की अलख जलाते थे व अंग्रेजों के साथ भी बैठक करते थे लेकिन कभी अंग्रेजों की गुलामी स्वीकार नहीं की व जब वे अंग्रेजी सेना से घिर गये तो स्वयं को गोली मार दी। इस मौके पर तिलक लाइब्रेरी के सचिव राकेश अग्रवाल ने कहा कि तिलक व चंद्रशेखर ने देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए सर्वोच्च बलिदा दिया, तिलक केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं बल्कि युग दृष्टा, राष्ट्रनिर्माता, प्रखर पत्रकार, समाज सुधारक, व जन जागरण के अग्रदूत थे। उनका जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नगिरि में हुआ था उन्होंने भारतीयों के मन से भय को निकालकर आत्म सम्मान, और स्वाभिमान का दीप जलाया, उनका नारा स्वराज मेंरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मै इसे लेकर रहूंगा। उन्होंने शिक्षा को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ा। उन्होंने कहा कि अगर हम अपने कार्य के प्रति पूरी निष्ठा से कार्य करें, समाज में सदभाव रखें, सत्य व न्याय का साथ दें, व देश हित को सर्वोपरि रखे तो देश विश्व में अग्रणी राष्ट्र बनने से कोई रोक नहीं सकता ऐसा करना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस मौके पर डा. मनोज रयाल, राकेश अग्रवाल, अधिवक्ता सीआर आर्य, संतोष आर्य, एनके साहनी, पवन कुमार गोयल, बिजेंद्र पुंडीर, काजल टम्टा, रजत राणा, रवि पंवार, नितिन सिंह, आस्था, डा. देवेंद्र कुमार, राखी पंवार, शरद गुप्ता, बिंद्रा गुसांई, ललिता लेखवार आदि मौजूद रहे।

