मसूरी। आर्य समाज मसूरी के त्रिदिवसीय वार्षिकोत्सव में आर्य उपदेशक डॉ. वीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि सुखी व्यक्ति के प्रति मित्रताए दुःखी व्यक्ति के प्रति करुणाए विद्वान आचार्यों एवं धर्मात्मा लोगों के प्रति प्रसन्नता अर्थात् मुदिता तथा दुष्ट एवं नीच व्यक्ति के प्रति उपेक्षा का भाव रखना चाहिए। इन चारों भावों को मन में धारण करने से मनुष्य ईश्वर.प्राप्ति के मार्ग पर अग्रसर होता है।
आर्य कन्या गुरुकुल देहरादून से पधारीं डॉण् अन्नपूर्णा ने कहा कि उल्लू के समान मोहए भेडि़ये के समान क्रोधए कुत्ते के समान ईर्ष्याए चिड़े के समान कामनाए गरुड़ के समान अहंकार और गिद्ध के समान लोभ रखने वाला व्यक्ति ईश्वर के मार्ग पर नहीं चल सकता। ईश्वर.प्राप्ति के लिए इन सभी दुर्गुणों का पूर्णतः त्याग करना आवश्यक है। कार्यक्रम में दिल्ली गंगोह रामपुर मनिहारान सहारनपुर और मुजफ्फरनगर सहित विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। प्रसिद्ध भजनोपदेशक सुमित अंगिरस ने शास्त्रीय रागों पर आधारित मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर आर्य समाज मसूरी के प्रधान आनंद रस्तोगी ने सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का धन्यवाद किया। कार्यक्रम में डॉ सरला प्रधान, अनुराग रस्तोगी, राजेश नांगिया, प्रणव साहनी,सतीश रोहिला सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

