गंगा घाट पर भव्य एवं दिव्य आत्मा उद्धारक भगवान शिव अग्निहोत्रम संपन्न।

मसूरी:-  जयेष्ठ पूर्णिमा के शुभ अवसर पर आर्यम इंटरनेशन फाउंडेशन, भगवान शंकर आश्रम, मसूरी द्वारा गंगोत्री मंदिर के समक्ष गंगा घाट पर भव्य एवं दिव्य आत्मा उद्धारक भगवान शिव अग्निहोत्रम संपन्न हुआ। जिसमें देश विदेश से 200 श्रद्धालुओं ने अपनी सहभागिता दी।
समस्त कार्यक्रम ट्रस्ट के मुख्य अधिष्ठाता परमप्रज्ञ जगद्गुरु प्रोफ़ेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम जी महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ। भगवान शिव के मंगलकारी मंत्रों से समस्त गंगोत्री घाटी गूँज उठी। परमपूज्य गुरुदेव श्री ने गंगोत्री मंदिर में अग्निहोत्रम करने के विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व पर प्रकाश डाला। गंगोत्री मंदिर को माँ गंगा का उद्गम स्थल माना गया है। कथा आती है कि राजा सगर के ६० हज़ार पुत्रों की आत्मा के उद्धार हेतु उनके वंशज राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या कर माँ गंगा के अवतरण की मनोकामना की किंतु गंगा का प्रवाह इतना तीव्र है कि उसका वेग पृथ्वी सह नहीं सकती थी। इस हेतु भगीरथ ने भगवान शिव की आराधना कर उनका स्मरण किया। महादेव ने तब माँ गंगा के प्रबल प्रवाह को अपनी जटाओं में समाया और धीरे-धीरे धरती पर प्रवाहित किया। इसी कारण आर्यम गंगोत्री २०२५ महानुष्ठान का नाम आत्मा उद्धारक भगवान शिव अग्निहोत्रम भी रखा गया। माँ गंगा की गोद में बैठकर अग्निहोत्रम करने से वातावरण शुद्ध होता है और ईश्वर भक्त अपने पितरों की आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना करते हैं। जहाँ यह मान्यता है कि गंगा में स्नान भर कर लेने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट होते हैं वहीं गंगोत्री तट पर विशेष पूजा अर्चना के कर्म से बुद्धि और आत्मा की शुद्धि, और श्रद्धालु को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। गुरुदेव श्री आर्यम का कथन है कि अग्निहोत्रम और वैदिक पद्धतियों से किए गए पूजा पाठ व्यक्ति के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का रूपांतरण करते हैं। आज के युग में जहाँ केवल बाहरी, कृत्रिम और क्षणिक उन्नति पर दृष्टि है वहीं आत्मिक उन्नति और मानसिक शांति केवल ईश्वर स्तुति से ही संभव है। जहाँ प्रकृति अपने वास्तविक स्वरूप में विद्यमान हो वहाँ की गई पूजा पाठ अधिक गति से लाभ और शुभता प्रदान करती है।

 

 

गंगोत्री में की गई ईश्वर प्रार्थना शांति, सुख, समृद्धि, अबोध दुष्कर्मों से छुटकारा, जीवन की अड़चनों, एवं पितृ दोष और पितरों को शांति प्रदान करती है। चूँकि भगवान शिव ही गंगा के प्रवाह को संभाले हुए हैं अकाल मृत्यु जैसे अन्य योगों से भी आप स्वयं को रक्षित करते हैं। इससे पूर्व संध्या पर गंगा आरती और गंगा अर्चना का भी आयोजन हुआ जिसमें कथा वाचक ठाकुर देवकी नंदन भी उपस्थित रहे। ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता माँ यामिनी श्री ने बताया कि समस्त विश्व में आर्यम जी महाराज ही हिंदू धर्म के मूल तत्त्व को इस धरा से मिला रहे हैं। कई सामान्य पदार्थों के साथ आत्मा उद्धारक अग्निहोत्रम में ऐंबर, पद्माक्ष, अगर-तगर, रक्त चंदन, श्वेत चंदन, केसर, दालचीनी, जावित्री की आहुति दी गई। परमप्रज्ञ आर्यम जी महाराज के शिष्य केवल भारत भूभाग में ही नहीं बल्कि समस्त विश्व में हिंदुत्व की लौ का दीपक जगा रहे हैं। ज्ञातव्य हो कि गुरुदेव के सानिध्य में हज़ारों हज़ार लोगों का जीवन रूपांतरित हो रहा है। वैदिक मंत्रों से यज्ञ, पुष्पार्चन, एवं विधिवत पाठ ही आपके जीवन में शुभता का उदय करने क्षमता रखते हैं। मसूरी से रुद्राक्ष, कपूर और बिल्वपत्र से लाए गए पौधे गंगोत्री मंदिर समिति को भेंट किए गए। श्री पाँच मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्मानंद सेमवाल ,सचिव सुरेश सेमवाल, कोषाध्यक्ष सुशील सेमवाल, श्री गंगा पुरोहित सभा के अध्यक्ष संजीव सेमवाल,सचिव पंडित माधव नंदन सेमवाल, पवन सेमवाल, दिनेश सेमवाल, अशोक सेमवाल, रमेश चंद्र सेमवाल, विपिन सेमवाल, दीपक सेमवाल, सिद्धार्थ सेमवाल, कृष्णानंद सेमवाल, मनोहर सेमवाल आदि का सहयोग रहा। कार्यक्रम को सफल बनाने में सुनील कुमार आर्य, अजीत कुंदन, सोनिया कुंदन, राकेश रघुवंशी,संध्या रघुवंशी, श्वेता जायसवाल, सुधीर चौधरी, रोहित वेदवान, हरीश त्यागी, प्रीतेश आर्यम, प्रविंद्र, हर्षिता आर्यम, शालिनी अरोड़ा, गौरव स्वामी, आदि का सहयोग रहा।